झारसुगुड़ा : झारसुगुड़ा रेलवे स्टेशन परिसर में बाल सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से एक समन्वय बैठक आयोजित की गई. भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा रेलवे मंत्रालय के बीच हुए समझौता (एमओयू) के तहत व्यस्त रेलवे स्टेशनों पर चाइल्ड हेल्प डेस्क (1098) की प्रभावी कार्यप्रणाली और चाइल्ड हेल्प ग्रुप के बेहतर समन्वय को लेकर विस्तृत चर्चा की गई.
बैठक में बताया गया कि जिला प्रशासन के सहयोग से झारसुगुड़ा रेलवे स्टेशन पर 6 नवंबर 2024 से चाइल्ड हेल्प डेस्क (1098) 24×7 संचालित हो रही है. यहां छह कर्मचारी तैनात हैं, जो स्टेशन परिसर में संकटग्रस्त, उपेक्षित, लापता तथा मानव तस्करी के खतरे वाले बच्चों की पहचान, बचाव और सहायता का कार्य कर रहे हैं.
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि ट्रेन या रेलवे स्टेशन से बरामद बच्चों को तत्काल सुरक्षित संरक्षण में लेकर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) अथवा किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) के समक्ष प्रस्तुत किया जाए तथा उनके पुनर्वास के लिए सभी संबंधित विभाग समन्वित रूप से कार्य करें.
इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक लापता बच्चे के मामले को संभावित अपराध या मानव तस्करी से जुड़ा मामला मानते हुए एफआईआर दर्ज करने तथा बाल संरक्षण से संबंधित सभी नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई.
बैठक में जिला बाल संरक्षण अधिकारी सुनंद महाराणा, बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष संयुक्ता महापात्र, स्टेशन प्रबंधक मनोज कुमार बेहुरा, मुख्य वाणिज्यिक निरीक्षक चंदन कुमार मिश्रा, जीआरपी के सब-इंस्पेक्टर मुकेश कुमार वर्णवाल, आरपीएफ के सब-इंस्पेक्टर डी. कुमार, उद्धव चंद्र खमारी, चाइल्ड हेल्पलाइन के समन्वयक विपुल चंद्र पाणिग्राही तथा चाइल्ड हेल्प डेस्क के सदस्य झरना पटनायक, मनोज साहू, पूर्णचंद्र राणा, बापी मलिक, ममता मलिक और गुलशन प्रधान सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे.
