जमशेदपुर के 250 से अधिक घरों में घुसा नाले का पानी, इलाकें में बाढ़ जैसे हालात

ओडिशा में मूसलाधार बारिश और ब्यांगबिल डैम से पानी छोड़े जाने के बाद जमशेदपुर की खरकई और स्वर्णरेखा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. बागबेड़ा के निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, जिससे 250 से अधिक घर जलमग्न हो गए हैं.

जमशेदपुर: किसी के लिए बारिश का मौसम सुहाना होता है, तो किसी के लिए यह किसी सजा से कम नहीं होता. ओडिशा में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और ब्यांगबिल डैम के दो गेट खोले जाने के बाद जमशेदपुर में खरकई और स्वर्णरेखा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. इसका सबसे ज्यादा असर बागबेड़ा के निचले इलाकों में देखने को मिल रहा है, जहां बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं.

बागबेड़ा नया बस्ती में नाले का पानी अवरुद्ध होने और रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण देर रात 250 से अधिक घरों में नाले का गंदा पानी घुस गया. बागबेड़ा नया बस्ती रोड नंबर-2 के अधिकांश घर जलमग्न हो गए हैं. कई परिवार अपने घर छोड़कर सामुदायिक भवन में शरण लेने को मजबूर हैं.


निचले इलाकों में घुसा पानी

हालात ऐसे हैं कि कई घरों का ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह पानी में डूब गया है. लोग अपने घरों की पहली मंजिल, छत और सीढ़ियों पर दिन बिताने को मजबूर हैं. खाने और सोने तक में परेशानी हो रही है. नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है.

लोगों ने खाली किया अपना घर

स्थानीय लोगों का कहना है कि वे हर साल इसी तरह की परेशानी झेलते हैं, लेकिन अब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है. रात के समय अचानक पानी बढ़ने की आशंका से कई परिवारों ने एहतियात के तौर पर अपने-अपने घर खाली कर दिये हैं और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने चले गये हैं. स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलजमाव के कारण घरों से बाहर निकलना भी दूभर हो गया है. रात में बारिश और तेज हुई व पानी का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा जिससे स्थिति और गंभीर हो गई. बागबेड़ा निवासी ने इस स्थिति में परेशान हो कर कहा की "हर साल नाले की सही सफाई न होने और समुचित निकासी व्यवस्था के अभाव में हमें यह दर्द झेलना पड़ता है".


बाहर खड़े लोग

प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार

बढ़ते संकट को देखते हुए स्थानीय लोगों ने सीओ मनोज कुमार को स्थिति की पूरी जानकारी दे दी है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से मौके पर पहुंचकर स्थिति का मुआयना किया जाये. पानी की निकासी के लिए तुरंत पंप या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था की जाये. प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित आश्रय और राहत सामग्री का प्रबंध किया जाये. फिलहाल, नदियों और नालों के बढ़ते जलस्तर के बीच नया बस्ती के लोगों की निगाहें पूरी तरह से प्रशासनिक कार्रवाई और राहत कार्य पर टिकी हुई है.


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लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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