jamshedpur news : हाइकोर्ट से नहीं मिली राहत, दूसरे दिन भी अवैध निर्माण से जुड़ीं 7 याचिकाएं खारिज

जेएनएसी क्षेत्र में नक्शा विचलन और अवैध निर्माण का मामला

जेएनएसी क्षेत्र में नक्शा विचलन और अवैध निर्माण का मामला

एक दिन पहले भी 16 याचिकाओं को अदालत ने बताया था मेरिटलेस

अब 9 मार्च को होगी अगली सुनवाई

jamshedpur news :

जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) क्षेत्र में नक्शा विचलन और अवैध निर्माण के मामले में भवन मालिकों को गुरुवार को दूसरे दिन भी झारखंड हाइकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है. गुरुवार को चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से दायर अन्य 7 ( आइए ) याचिकाओं को भी खारिज कर दिया. अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में 28 जनवरी को ही विस्तृत आदेश पारित किया जा चुका है और अवैध निर्माण को नियमित करने की मांग वाली कुल 16 याचिकाएं बुधवार को ही खारिज की जा चुकी हैं. अब इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई 9 मार्च को निर्धारित की गयी है.

””नैसर्गिक न्याय”” की दलीलें दरकिनार

सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों के अधिवक्ता रवि कुमार मिश्र ने पक्ष रखते हुए कहा कि बुधवार को उनके मामले की सुनवाई नहीं हो सकी थी. उन्होंने दलील दी कि न्यायिक प्रक्रिया और नैसर्गिक न्याय का पालन नहीं किया गया है और यदि अवसर मिलता तो वे सिविल कोर्ट या ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाते. खंडपीठ ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया. प्रार्थी राकेश कुमार झा की ओर से दायर जनहित याचिका (2078/2018) में जेएनएसी क्षेत्र के अवैध ढांचों को ध्वस्त करने की मांग की गयी है, जिस पर कोर्ट ने 14 जनवरी को ही एक माह के भीतर कार्रवाई का निर्देश दिया था.

अधिकारियों की मिलीभगत पर कोर्ट सख्त

कोर्ट द्वारा नियुक्त तीन वकीलों की कमेटी की रिपोर्ट में भवन उपनियमों (बिल्डिंग बायलॉज) के घोर उल्लंघन की बात सामने आयी थी. अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के ऐसा निर्माण संभव नहीं है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जानबूझकर किये गये उल्लंघन को नियमित नहीं किया जा सकता. यह नियम मानने वाले ईमानदार नागरिकों के साथ भेदभाव है.

आज मिलेगा 24 घंटे का अंतिम नोटिस

जेएनएसी शुक्रवार को 24 चिह्नित भवन मालिकों को अंतिम और तीसरा नोटिस जारी करेगी. इससे पहले जेएनएसी की ओर से भवन मालिकों को सात दिन और 48 घंटे के दो नोटिस दिये जा चुके हैं. भवनों के स्वीकृत नक्शे का मिलान वर्तमान ढांचे से मापी कर की गयी. अब शुक्रवार को 24 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम देने के बाद जेएनएसी शनिवार या सोमवार से अवैध ढांचों को ढहाने की कार्रवाई शुरू कर सकती है. हाइकोर्ट के आदेश के अनुपालन को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है.

सुप्रीम कोर्ट के ””बुलडोजर”” फैसले का हवाला भी रहा बेअसर

सुनवाई के दौरान याचिकाओं में सुप्रीम कोर्ट के हालिया बुलडोजर न्याय संबंधी फैसले का भी संदर्भ दिया गया था. हाइकोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह कार्रवाई किसी प्रतिशोध या आपराधिक मामले की वजह से नहीं, बल्कि कानून के उल्लंघन और उचित जांच रिपोर्ट के आधार पर की जा रही है. कोर्ट ने यह भी दोहराया कि बिना ””कंपलीशन सर्टिफिकेट”” वाली इमारतें सीधे तौर पर अवैध की श्रेणी में आती हैं.

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Published by: Akhilesh kumar

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