जमशेदपुर : निखार सबलोक हत्याकांड का पुलिस ने बुधवार को खुलासा कर दिया. इसमें मुख्य साजिशकर्ता अशोक सिंह राघव व उत्तर प्रदेश के दो शूटरों समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इसके बाद एक-एक कर कई नए खुलासे भी हो रहे हैं.
दुमका जेल में तैयार किया गया था हत्याकांड का ब्लू प्रिंट
दुमका जेल में हत्याकांड का ब्लू प्रिंट तैयार किया गया था. इसमें सिर्फ कदमा विजया हेरिटेज निवासी और होटल कारोबारी निखार सबलोक ही नहीं था, बल्कि गणेश सिंह गिरोह के सदस्य बागबेड़ा निवासी विजय सिंह उर्फ मोनू , मानगो डिमना रोड निवासी राजा शर्मा और एक भाजपा नेता की हत्या की तैयारी थी. विक्रम शर्मा की हत्या का बदला लेने और जमशेदपुर में वर्चस्व कायम रखने के लिए हत्या का ब्लू प्रिंट तैयार किया गया था. ये तथ्य पुलिस जांच में सामने आये हैं.
अशोक सिंह राघव कर रहा था फाइनेंस
पुलिस सूत्रों की मानें तो हत्या की योजना में उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर निवासी शिबू सिंह को शामिल किया गया. शिबू सिंह को भी शूटरों की व्यवस्था का जिम्मा दिया गया था. टारगेट पर निगरानी रखने की जिम्मेवारी शातिर बदमाश मानगो डिमना रोड निवासी अभिमन्यु सिंह उर्फ सिंटू सिंह को सौंपी गयी थी. फाइनांस अशोक सिंह राघव कर रहा था. इसके लिए उत्तर प्रदेश सुलतानपुर निवासी प्रमोद सिंह से शिबू सिंह ने संपर्क किया और शूटरों को जमशेदपुर भेजवाया. इसके लिए प्रमोद को 15 हजार रुपये दिये गये.
सुशील व सुनील की जिम्मेवारी शूटरों को ठहराने की थी
जमशेदपुर पहुंचने पर सुशील केराई और सुनील रजक की जिम्मेवारी शूटरों को ठहराने की थी. सुशील और सुनील सिंटू सिंह की काफी करीबी है. पूर्व में बागबेड़ा में विजय सिंह उर्फ मोनू पर फायरिंग मामले में सुनील जेल जा चुका है. निखार की निगरानी के लिए सिंटू ने ही सुनील की मदद से आइ-10 कार खरीदी थी. इसके अलावा शूटरों को हथियार भी सिंटू और सुशील ने उपलब्ध कराया था. निगरानी टीम निखार के साथ ही मोनू के अलावा भाजपा नेता की भी रेकी लगातार कर रही थी.
19 अगस्त को प्रमोद सिंह के साथ यूपी से पहुंचे थे दो शूटर
पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आयी है कि निखार की हत्या गत 19 अगस्त को ही होनी थी. सुलतानपुर (उत्तर प्रदेश) निवासी और शातिर बदमाश प्रमोद सिंह 19 अगस्त को सुलतानपुर के ही दो शूटर अभिमन्यु यादव और उसके साथी राजकुमार सिंह उर्फ प्रिंस को लेकर सोनारी पहुंचा था. टाटानगर स्टेशन पर उतरने के बाद टेंपो से सभी सोनारी पहुंचे. उन्हें स्टेशन से लाने सुशील केराई और सुनील रजक गया था. तीनों सोनारी में ठहरे और निखार सबलोक पर निगरानी रखने लगे. शूटर हथियार से लैश थे. उनलोगों ने कदमा स्थित निखार के घर के अलावा सीएच एरिया और कदमा-सोनारी लिंक रोड पर निखार सबलोक की हत्या का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हुए. निखार सुबह मार्निंग वॉक के लिए जाते थे. इस दौरान भी हमला की कोशिश शूटरों ने की थी. 19 से 22 अगस्त तक राजकुमार, अभिमन्यु और प्रमोद ने निखार की हत्या का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बाद वे वापस लौट गये.
लाल रंग की कार से सोनारी पहुंचा था सुनील
फिर सुलतानपुर निवासी व शातिर अपराधी शिबू सिंह और अंकित सिंह खुद शहर पहुंचे. इस बीच रितेश सिंह, सुनील रजक और सुशील केराई के अलावा सिंटू सिंह के अन्य साथी लगातार निखार पर नजर रख रहे थे. वारदात के दिन सुनील लाल रंग की आइ10 कार से सोनारी पहुंचा. शिबू और अंकित को हाइवे ले गया. दोनों पहले एक होटल में रुके और निखार का पता किया, लेकिन निखार सबलोक वहां नहीं थे. इसके बाद तीनों वहां से निकल कर टेंथ माईल स्टोन होटल पहुंचे. जहां शिबू और अंकित होटल के अंदर गये, जबकि सुनील कार में बैठकर उनका इंतजार करने लगा. वारदात को अंजाम देने के बाद सभी रांची की ओर भागे. सुनील कार चला रहा था.
24 अगस्त को होनी थी दो हत्या
पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आयी है कि गत 24 अगस्त को गणेश सिंह गिरोह के दो सदस्यों की हत्या होनी थी. पहली हत्या निखार सबलोक की और दूसरी हत्या बागबेड़ा निवासी विजय सिंह उर्फ मोनू की. इसके लिए दोनों जगहों पर फिल्डिंग सजायी गयी थी. भुइयांडीह निति बाग कॉलोनी में वर्ष 2022 में अखिलेश सिंह गिरोह के कन्हैया सिंह और सुधीर दुबे गिरोह के बीच हुए गैंगवार मामले की कोर्ट में सुनवाई होनी थी, जिसमें अखिलेश गिरोह के कई सदस्य कोर्ट के अंदर और बाहर थे. उक्त तिथि को मोनू को भी कोर्ट में आना था, लेकिन वह कोर्ट नहीं पहुंचा. पुलिस सूत्रों के अनुसार गत 16 अगस्त को कांदरबेड़ा में भी विजय सिंह उर्फ मोनू की हत्या की योजना थी, लेकिन कार में काला शीशा होने का फायदा मोनू को मिला.
निखार की हत्या का यह बना बड़ा कारण
निखार सबलोक की हत्या का मुख्य कारण गणेश सिंह का करीबी होना था. निखार हाल के दिनों में गणेश सिंह का काफी करीबी बन गया था. इस कारण सोनारी, सिदगोड़ा और चांडिल में गणेश सिंह द्वारा जमीन के काम किये जाने पर निखार ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी गणेश सिंह के साथ संबंध सर्वविदित हो गया था, जिसके कारण निखार विरोधी गैंग की आंखों में खटकने लगा था. देहरादून में 13 फरवरी को गैंगेस्टर अखिलेश सिंह के कथित गुरु विक्रम शर्मा की हत्या में गणेश के गुर्गों की संलिप्तता सामने आयी है. लेकिन अखिलेश गिरोह की ओर से जवाबी कार्रवाई नहीं किये जाने से गणेश गिरोह के सदस्य शहर में सक्रिय हो गये और जमीन के कारोबार में खुलेआम काम करने लगे. विक्रम शर्मा की हत्या में शूटर अबतक पकड़े नहीं जा सके हैं, जबकि देहरादून पुलिस ने हत्यारोपियों पर दो-दो लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है. विक्रम शर्मा की हत्या का बदला लेना अखिलेश सिंह गिरोह के लिए चुनौती बनती जा रही थी.
राघव के मोबाइल में मिले निखार की तस्वीर के अलावा रुपये ट्रांजेक्शन के साक्ष्य
गिरफ्तार अशोक सिंह राघव के मोबाइल फोन से पुलिस ने निखार सबलोक की तस्वीर बरामद की है, जिसे शूटरों के मोबाइल से भी बरामद किया गया है. इसके अलावा प्रमोद सिंह को 15 हजार रुपये ट्रांजेक्शन के भी साक्ष्य मिले हैं. पुलिस की मानें तो निखार की हत्या की योजना बनाने के बाद अशोक सिंह राघव अपने साथियों के साथ कोलकाता चला गया, ताकि पुलिस की नजरों से बचा जा सके. जबकि अभिमन्यु सिंह उर्फ सिंटू रांची भाग गया.
