Jamshedpur : कहीं हनुमान चालीसा, तो कहीं सुंदरकांड का हुआ पाठ

कहीं हनुमान चालीसा, तो कहीं सुंदरकांड का हुआ पाठ

जमशेदपुर. रामभक्त हनुमान की जयंती पर शहर के मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया. लोगों ने कहीं हनुमान चालीसा, तो कहीं सुंदरकांड का सामूहिक पाठ किया. सुबह से देर शाम तक धार्मिक आयोजनों से शहर का माहौल भक्तिमय बना रहा. इस अवसर पर कई मंदिरों में रात में भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया गया, जिसमें काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया.

बिरला मंदिर में 108 बार हुआ हनुमान चालीसा पाठ

श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर (बिड़ला मंदिर) केवल टाउन में हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा का पाठ का आयोजन किया गया. मंदिर जीर्णोद्धार समिति के संयोजक सरयू राय के नेतृत्व में उक्त कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह रामभक्त हनुमान की पूजा कर की गयी. इस दौरान ग्यारह पंडितों के समूह द्वारा 108 बार हनुमान चालीसा का अखंड पाठ किया गया. पंडितों के साथ -साथ मंदिर के प्रांगण में भक्तों के द्वारा भी हनुमान चालीसा का पाठ किया गया. पंडित विनोद पांडेय ने हवन और आरती की. अंत में श्रद्धालुओं के बीच भोग प्रसाद का वितरण किया गया.

श्रीराम का हुआ पट्टाभिषेकम

बिष्टुपुर स्थित आंध्र भक्त श्रीराम मंदिर में हनुमान जयंती पर भगवान राम का पट्टाभिषेकम, यानी राज्याभिषेक अनुष्ठान किया गया. शाम छह बजे मंत्रोच्चारण के साथ पूजन प्रारंभ हुई. 14 वर्षों के वनवास से अयोध्या लौटने के उपलक्ष्य में भगवान का पट्टाभिषेकम किया गया. अंत में रामनवमी के अवसर पर फहराये गये झंडे को विधिवत उतारा गया. इससे पहले सुबह आठ बजे भगवान राम का जलाभिषेक एवं पूजा की गयी. मंदिर में सामूहिक रूप से ग्यारह बार हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया. अंत में प्रसाद का वितरण किया गया.

कृष्णा टेंपल में 108 बार हुआ हनुमान चालीसा पाठ

टेल्को स्थित भुवनेश्वरी मंदिर परिसर स्थित कृष्णा टेंपल में हनुमान जयंती के अवसर पर 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ किया गया. चालीसा पाठ सुबह नौ बजे शुरू हुआ, जो अपराह्न एक बजे के बाद तक चलता रहा. अंत में श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया. वहीं, राम मंदिर टेल्को में भी सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया गया.

श्री श्याम दरबार में हुआ सुंदर कांड पाठ

बिष्टुपुर स्थित श्री श्याम दरबार में हनुमान जन्मोत्सव का आयोजन किया गया. इस मौके पर हनुमानजी का विशेष शृंगार किया गया. पसंदीदा भोग लगाया गया. इसके बाद सुंदरकांड का पाठ किया गया. बाद में भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया.

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Author: AKHILESH KUMAR

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