जमशेदपुर: लौहनगरी में दुर्गा पूजा की तैयारियां अब तेज हो गई हैं. शहर की प्रमुख पूजा समितियों में शामिल न्यू सिदगोड़ा दुर्गा एवं काली पूजा समिति इस वर्ष श्रद्धालुओं के लिए एक खास आकर्षण लेकर आ रही है. इस बार समिति उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर भव्य पूजा पंडाल का निर्माण करा रही है.
माना जा रहा है कि यह पंडाल इस वर्ष शहर के सबसे चर्चित पूजा पंडालों में शामिल हो सकता है. समिति का उद्देश्य श्रद्धालुओं को मां दुर्गा के दर्शन के साथ-साथ काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अनुभव कराना है.
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुरू हुआ पंडाल निर्माण
सोमवार को विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कर पंडाल निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया. पारंपरिक तरीके से बांस गाड़कर निर्माण कार्य की शुरुआत की गई.
इस अवसर पर समिति के मुख्य संरक्षक चंद्रगुप्त सिंह के मार्गदर्शन में संरक्षक संजीव आचार्य, संजय सिंह, पंडित आनंद कुमार मिश्रा, गोपी राव, परशुराम सिंह बागी, जेपी, ओपी, दशरथ सिंह, सरोज कुमार दास, अनूप सिंह, रामेश्वर सिंह, शेषनाथ शुक्ला, संतोष कुमार पांडेय, कुनू सिंह, सुधीर सिंह और भीष्म दुबे समेत पूरी टीम मौजूद रही.
बंगाल के कारीगर तैयार कर रहे हैं भव्य पंडाल
समिति के मुख्य संरक्षक चंद्रगुप्त सिंह ने बताया कि इस बार पंडाल के निर्माण पर लगभग 17 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं.
पंडाल को आकर्षक और कलात्मक स्वरूप देने के लिए पश्चिम बंगाल से कुशल और अनुभवी कारीगरों की टीम को बुलाया गया है. कारीगर दिन-रात मेहनत कर काशी विश्वनाथ मंदिर की स्थापत्य कला और उसकी भव्यता को पंडाल के रूप में उकेरने में जुटे हैं.
समिति का कहना है कि इस बार केवल पंडाल ही नहीं, बल्कि विद्युत सज्जा और आंतरिक साज-सज्जा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र होगी.
1953 से लगातार जारी है पूजा की परंपरा
न्यू सिदगोड़ा दुर्गा एवं काली पूजा समिति का इतिहास काफी पुराना और गौरवशाली रहा है. समिति वर्ष 1953 से लगातार दुर्गा पूजा का आयोजन करती आ रही है.
पिछले सात दशकों से अधिक समय से समिति हर वर्ष नई और अनूठी थीम के जरिए श्रद्धालुओं को कुछ अलग दिखाने का प्रयास करती रही है. यही वजह है कि सिदगोड़ा की यह पूजा शहर की सबसे चर्चित और लोकप्रिय पूजाओं में गिनी जाती है.
इस बार क्यों खास होगी सिदगोड़ा की दुर्गा पूजा?
- काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर तैयार होगा पंडाल.
- निर्माण कार्य पर लगभग 17 लाख रुपये खर्च होंगे.
- पश्चिम बंगाल के कारीगर पंडाल को अंतिम रूप देने में जुटे हैं.
- विद्युत सज्जा और आंतरिक साज-सज्जा भी विशेष होगी.
- 1953 से चली आ रही है पूजा की परंपरा.
इस वर्ष समिति ने काशी विश्वनाथ मंदिर की थीम को चुनकर श्रद्धालुओं को एक अलग अनुभव देने की तैयारी की है. ऐसे में इस बार सिदगोड़ा का यह पूजा पंडाल शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकता है.
