घाटशिला : घाटशिला अनुमंडल अस्पताल परिसर में एनएच किनारे हादसों के शिकार लोगों को त्वरित इलाज देने के उद्देश्य से करीब 85 लाख रुपये की लागत से बना ट्रॉमा सेंटर (अभिघात केंद्र) डॉक्टरों की घोर कमी से जूझ रहा है. वर्ष 2020 में बनकर तैयार हुआ यह 10 बेड का ट्रॉमा सेंटर विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में अपनी उपयोगिता सिद्ध नहीं कर पा रहा है. आलम यह है कि सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायल मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार (First Aid) देकर जमशेदपुर के एमजीएम (MGM) अस्पताल रेफर कर दिया जाता है, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है.
महीने भर में 2 दर्जन हादसे, 4-5 मौतें, फिर भी नहीं जागे जिम्मेदार
घाटशिला क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य सड़कों पर दुर्घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं. बीते एक महीने में ही लगभग दो दर्जन सड़क हादसों में 4 से 5 लोगों की असमय मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. इसके बावजूद ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों की स्थायी बहाली को लेकर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, सेंटर के सुचारू संचालन के लिए यहां कम से कम एक हड्डी रोग विशेषज्ञ (Orthopedic), जनरल सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ और दो मेडिकल अफसरों की सख्त जरूरत है.
21 आउटसोर्सिंग स्टाफ के कंधे पर पूरी व्यवस्था का बोझ
वर्तमान में ट्रॉमा सेंटर का संचालन अनुमंडल अस्पताल के सीमित डॉक्टरों और आउटसोर्सिंग के जरिए बहाल 21 कर्मचारियों के भरोसे किसी तरह घिसट रहा है. इनमें 1 लैब टेक्नीशियन, 1 फार्मासिस्ट, 1 एक्स-रे टेक्नीशियन, 3 ड्रेसर, 6 एएनएम, 6 नर्सिंग स्टाफ, 1 ऑटो टेक्नीशियन, 2 नाइट गार्ड, 3 स्वीपर और 2 वार्डन शामिल हैं, जो सीमित संसाधनों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पूरे मामले पर जब पूर्वी सिंहभूम के सिविल सर्जन से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनसे बात नहीं हो सकी.
स्वास्थ्य मंत्री को कराया गया है अवगत: विधायक रामदास सोरेन
मामले पर स्थानीय विधायक रामदास सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार ट्रॉमा सेंटर में सभी आवश्यक चिकित्सीय सुविधाएं बहाल करने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा, "मैंने इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री को पूर्व में ही लिखित रूप से अवगत करा दिया है. जैसे ही डॉक्टरों की व्यवस्था होती है, यहां पदस्थापना कर दी जाएगी। घाटशिला अनुमंडल अस्पताल बेहतर काम कर रहा है और इसे पहले भी पुरस्कृत किया जा चुका है."
