सिदगोड़ा स्थित जैप-6 (झारखंड सशस्त्र पुलिस) मुख्यालय में रसोई गैस की आपूर्ति ठप होने से गंभीर समस्या खड़ी हो गयी है. यहां तैनात करीब 450 से अधिक जवानों और प्रशिक्षुओं के लिए अब पारंपरिक तरीके से लकड़ियों पर भोजन तैयार किया जा रहा है. जैप परिसर में वर्तमान में ट्रेनी सेंटर के चार बैच और दो बटालियन की टीमें तैनात हैं, जिनके रहने और तीनों वक्त के भोजन की व्यवस्था कैंटीन के माध्यम से की जाती है.
एजेंसी ने हाथ खड़े किये, लकड़ियां बनीं सहारा
जानकारी के अनुसार, जैप-6 की कैंटीन में प्रतिदिन औसतन दो-तीन कॉमर्शियल सिलिंडरों का उपयोग होता था. आपूर्ति करने वाली गैस एजेंसी ने दो दिनों तक तो सहयोग किया, लेकिन उसके बाद भविष्य में आपूर्ति करने में असमर्थता जता दी. आपूर्ति बाधित होने के बाद कैंटीन प्रबंधन के समक्ष भोजन पकाने का संकट खड़ा हो गया. स्थिति को देखते हुए वरीय अधिकारियों के निर्देश पर फिलहाल लकड़ियों की व्यवस्था की गयी है. अब प्रतिदिन 100 किलो से अधिक लकड़ियां जलावन के रूप में इस्तेमाल हो रही हैं.
गर्मी में बढ़ गयी है जवानों की परेशानी
भीषण गर्मी के इस मौसम में खुले में लकड़ियों पर खाना बनाना रसोइयों और जवानों के लिए अतिरिक्त श्रम और कष्ट का कारण बन रहा है. जैप के जिम्मेदारों ने बताया कि गैस एजेंसी का कहना है कि यदि उच्च अधिकारियों या मुख्यालय से कोई विशेष आदेश आता है, तभी वे आपूर्ति बहाल कर पायेंगे. इस संबंध में जैप अधिकारियों ने पुलिस मुख्यालय को लिखित रूप से सूचित कर दिया है. कैंटीन प्रबंधन के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि प्रतिदिन इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ियां कहां से आयेंगी. अधिकारियों को उम्मीद है कि मुख्यालय के हस्तक्षेप के बाद जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य हो जायेगी.
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