झारखंड आंदोलन के महानायक और पद्मभूषण दिशोम गुरु शिबू सोरेन की याद में मंगलवार को जमशेदपुर में एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला. सोनारी ईस्ट क्षेत्र में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से दिशोम गुरु की शहर में पहली प्रतिमा का भव्य अनावरण किया गया. इस मौके पर आदिवासी परंपरा और रीति-रिवाज के अनुसार पूजा-अर्चना कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई.
आदिवासी परंपरा के साथ हुआ कार्यक्रम
प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में झामुमो के नेता, कार्यकर्ता और आदिवासी-मूलवासी समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए. पारंपरिक विधि-विधान के साथ सामूहिक प्रार्थना की गई और दिशोम गुरु को याद किया गया. इसके बाद लोगों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए.
पूरे कार्यक्रम स्थल पर "दिशोम गुरु अमर रहें", "जोहार दिशोम गुरु" और "झारखंड के जननायक अमर रहें" जैसे नारों की गूंज सुनाई दी. लोगों ने शिबू सोरेन के संघर्ष और झारखंड के लिए उनके योगदान को याद किया.
संघर्ष और विचारों की याद दिलाती रहेगी प्रतिमा
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि शिबू सोरेन ने अलग झारखंड राज्य के आंदोलन को नई दिशा दी. उन्होंने आदिवासी, मूलवासी, दलित और वंचित समाज के अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाया.
नेताओं ने कहा कि सोनारी में स्थापित यह प्रतिमा सिर्फ एक स्मारक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र होगी. यह प्रतिमा दिशोम गुरु के संघर्ष, त्याग और सामाजिक न्याय के प्रति उनके समर्पण की याद हमेशा दिलाती रहेगी.
