पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया का कहर, 14 दिनों में 1,826 मरीज; पोटका और डुमरिया सबसे अधिक प्रभावित

पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, पिछले 14 दिनों में 1826 मरीज मिल चुके हैं. पोटका और डुमरिया जैसे प्रखंडों में स्थिति गंभीर है. स्वास्थ्य विभाग ने जांच और जागरूकता अभियान तेज कर दिया है.

पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया तेजी से पैर पसार रहा है. शनिवार को जिले के विभिन्न प्रखंडों में चले सघन जांच अभियान के दौरान 15,505 लोगों की जांच की गयी, जिसमें 110 नये मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई. इसी के साथ पिछले 14 दिनों के भीतर जिले में कुल मलेरिया मरीजों की संख्या 1,826 तक पहुंच गयी है, जिसने स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है.

अब तक जिले में कुल 93,275 लोगों की जांच की जा चुकी है, जिसमें से 1,441 मरीज खतरनाक ब्रेन मलेरिया (फाल्सीपेरम) और 338 मरीज सामान्य मलेरिया (विवैक्स) से संक्रमित पाये गये हैं.

पोटका की स्थिति गंभीर, डुमरिया में भी हालात खराब

जिले में सबसे गंभीर स्थिति पोटका प्रखंड की है, जहां अब तक सर्वाधिक 634 मरीज मिल चुके हैं. वहीं डुमरिया प्रखंड में हालात खराब हैं. प्रखंड : संक्रमित मरीज

पोटका : 634डुमरिया : 421

मुसाबनी : 332घाटशिला : 199

पटमदा : 100बहरागोड़ा : 13

चाकुलिया : 08

पोटका में 43 नये मरीज मिले, पटमदा में दो दिनों में 42 मामले शनिवार को पोटका के 43 स्थानों पर विशेष कैंप लगाकर 2,433 ग्रामीणों की जांच की गयी, जिसमें 43 नये ब्रेन मलेरिया के मरीज मिले. पटमदा सीएचसी में भी पिछले दो दिनों में 42 नये पॉजिटिव मामले सामने आये हैं.

चाकुलिया में 1107 की जांच हुई, बहरागोड़ा में अबतक 5044 टेस्ट चाकुलिया और बहरागोड़ा के स्कूलों व गांवों में भी लगातार स्क्रीनिंग की जा रही है. शनिवार को चाकुलिया में 1107 लोगों की जांच किट के माध्यम से हुई. इनमें से दो (एक ब्रेन मलेरिया व एक सामान्य) पॉजिटिव मिले. बर्डीकानपुर कालापाथर पंचायत के लाउबेड़ा निवासी सलाई मांडी (35) सामान्य मलेरिया संक्रमित और बड़ियागाजाड़ के सुराई हेंब्रम ब्रेन मलेरिया से पीड़ित मिले. चाकुलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉ आर एन शर्मा ने दोनों की जांच कर दवाइयां उपलब्ध करायी. चाकुलिया में 29 जून से अबतक आठ मरीज मिले हैं. बहरागोड़ा में बीते 29 जून से अब तक 5044 लोगों की मलेरिया जांच की जा चुकी है. जिसमें से कुल 13 लोग पॉजिटिव पाये गये हैं.

एमजीएम अस्पताल में 9 मरीज भर्ती, एक गंभीर

गंभीर मरीजों को तुरंत बेहतर इलाज के लिए रेफर किया जा रहा है. वर्तमान में एमजीएम अस्पताल में 9 मलेरिया मरीजों का इलाज चल रहा है, जिनमें से एक की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है. मॉनसून के दस्तक देते ही बढ़ते मच्छरों के प्रकोप को देखते हुए सिविल सर्जन ने सदर और एमजीएम अस्पताल को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने और हर संदिग्ध बुखार पीड़ित की तत्काल मलेरिया जांच करने का सख्त निर्देश दिया है.

नयी रणनीति : प्रतिदिन 5,000 जांच का लक्ष्य, ग्राम प्रधानों का लिया जायेगा सहयोगसिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने पोटका सीएचसी में समीक्षा बैठक करते हुए अधिकारियों को रोजाना कम से कम 5,000 लोगों की आरडीके (रैपिड डायग्नोस्टिक किट) जांच करने का लक्ष्य दिया है. उन्होंने निर्देश दिया कि जिस भी गांव में मरीज मिले, वहां 3 दिनों के भीतर पूरे गांव की स्क्रीनिंग कर डेटा आइएचआइपी पोर्टल पर जियो-टैग फोटो के साथ अपलोड किया जाये.

अंधविश्वास के खिलाफ चलेगा अभियानस्वास्थ्य विभाग ने पाया है कि ग्रामीण इलाकों में लोग मलेरिया होने पर झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं, जिससे स्थिति बिगड़ जाती है. अब इस अंधविश्वास को दूर करने के लिए ग्राम प्रधानों के सहयोग से ग्राम सभाएं आयोजित की जायेंगी. ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा कि वे बुखार आने पर सीधे अस्पताल आएं. इसके अलावा सभी कस्तूरबा व आवासीय विद्यालयों में नियमित जांच और प्रभावित इलाकों में एंटी-लार्वा का छिड़काव किया जा रहा है.


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Author: Sanjay sardar

Published by: Priya Gupta

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