अपनों को भूलना या घर का रास्ता भटकना सिर्फ उम्र का असर नहीं, बुजुर्गों में ऐसे दिखते हैं अल्जाइमर के संकेत

क्या आपके प्रियजन बार-बार चीजें रखकर भूल जाते हैं या घर का रास्ता भटक जाते हैं? यह सिर्फ उम्र का प्रभाव नहीं हो सकता. यह अल्जाइमर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं, जो समय के साथ गंभीर रूप ले सकता है.

जमशेदपुर: उम्र बढ़ने के साथ भूलने की समस्या को अक्सर सामान्य मान लिया जाता है. लेकिन अगर कोई बुजुर्ग बार-बार रोजमर्रा की चीजें रखकर भूलने लगे, घर का रास्ता याद न रहे या सामान्य काम करने में परेशानी होने लगे, तो इसे सिर्फ उम्र का असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ये अल्जाइमर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं.

21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस के मौके पर विशेषज्ञों ने बुजुर्गों में बढ़ती भूलने की समस्या को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है. राज्य के प्रमुख अस्पतालों के मनोरोग विभाग के ओपीडी में अल्जाइमर और स्मृति संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या में 25 से 30 प्रतिशत तक इजाफा देखा जा रहा है. डॉक्टरों के अनुसार 60 से 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों में इसका खतरा ज्यादा रहता है.

रोजमर्रा की छोटी भूल को न करें नजरअंदाज

सदर अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. महेश हेंब्रम ने बताया कि अस्पताल के ओपीडी में प्रतिदिन तीन से चार मरीज भूलने या स्मृति संबंधी समस्याओं को लेकर परामर्श के लिए पहुंचते हैं. उन्होंने बताया कि अल्जाइमर मस्तिष्क से जुड़ी एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है. उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ता है. अकेलापन, सामाजिक रूप से कटे रहना, हाई बीपी और डायबिटीज भी इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं.

हरहरगुडू निवासी 83 वर्षीय टिस्को से रिटायर्ड कर्मचारी के मामले में परिवार को पहले उनकी भूलने की समस्या सामान्य लगी. वह हर शाम घर से कुछ दूरी पर टहलने जाते थे. कुछ दिन पहले वह टहलने निकले, लेकिन घर का रास्ता भूलकर करनडीह की तरफ चले गये. घंटों रास्ता खोजते रहे. बाद में घर के पास रहने वाले एक व्यक्ति ने उन्हें देखा और घर पहुंचाया.

परिजनों के अनुसार, पिछले छह महीने से वह छोटी-छोटी बातें भूलने लगे थे. परिवार ने इसे उम्र का असर समझकर इलाज नहीं कराया. अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें अल्जाइमर से पीड़ित बताया. चश्मा फ्रिज में मिला, कपड़े पहनने में भी होने लगी परेशानी

मानगो निवासी 65 वर्षीय व्यक्ति भी रोज इस्तेमाल होने वाली चीजें रखकर भूलने लगे. कभी उनका चश्मा फ्रिज में मिलता, तो कभी जरूरी कागजात अलमारी के पीछे. धीरे-धीरे स्थिति ऐसी हो गयी कि उन्हें कपड़े पहनने और चम्मच पकड़ने जैसे सामान्य काम करने में भी परेशानी होने लगी. परिजन उन्हें डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे, जहां मनोरोग विभाग के डॉक्टरों ने अल्जाइमर की बीमारी बताते हुए इलाज शुरू किया.

अल्जाइमर में दिमाग की कोशिकाएं प्रभावित होने के कारण याददाश्त, सोचने की क्षमता और व्यवहार में बदलाव आने लगते हैं. समय के साथ समस्या बढ़ सकती है और इसका असर रोजमर्रा के जीवन पर पड़ता है. यह डिमेंशिया का सबसे सामान्य रूप है.

ये लक्षण दिखें तो रहें सतर्क

याददाश्त कमजोर होना निर्णय लेने में परेशानी बोलने में दिक्कत सामान्य काम करने में कठिनाई सामान रखकर भूल जाना घर का रास्ता भूल जाना मूड या स्वभाव में बदलाव

बीमारी का खतरा किन कारणों से बढ़ सकता है

विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक जीवनशैली, हाई बीपी, डायबिटीज और कई बार सिर में चोट लगने जैसी स्थितियां अल्जाइमर के जोखिम से जुड़ी हो सकती हैं. बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन शुरुआती स्तर पर डॉक्टर से सलाह और इलाज से मरीज की स्थिति को संभालने में मदद मिल सकती है.

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लेखक के बारे में

By भूमि शर्मा

भूमि शर्मा पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ बतौर कंटेंट राइटर जुड़ी हुई हैं. वर्तमान में वह मुख्य रूप से जमशेदपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों की खबरों को कवर करती हैं. इससे पहले वह एजुकेशन बीट और झारखंड बीट पर भी काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने शैक्षणिक बदलावों और राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर लेखन किया है.

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