जमशेदपुर : कुड़माली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग अब दिल्ली तक पहुंच गई है. इस मुद्दे को लेकर जमशेदपुर के सांसद विद्युतवरण महतो समेत चार सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा.
सांसदों ने कहा कि कुड़माली भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की मांग लंबे समय से उठती रही है. यह सिर्फ एक भाषा का सवाल नहीं है, बल्कि लाखों लोगों की भाषायी, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान से जुड़ा मुद्दा है.
झारखंड, बंगाल और ओडिशा के लाखों लोग बोलते हैं कुड़माली
सांसदों ने गृह मंत्री को बताया कि कुड़माली भाषा पश्चिम बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र की प्रमुख भाषाओं में से एक है. पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर में बड़ी संख्या में लोग इस भाषा का इस्तेमाल करते हैं.
इसके अलावा झारखंड के रांची, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग, गिरिडीह, जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां में भी यह भाषा व्यापक रूप से बोली जाती है. ओडिशा के मयूरभंज, क्योंझर और सुंदरगढ़ में भी कुड़माली भाषी समुदाय की बड़ी आबादी है.
अमित शाह ने कहा- मांग जायज है
सांसदों ने गृह मंत्री से मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और जरूरी प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया.
अमित शाह ने सांसदों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग जायज है और यह व्यापक जनहित से जुड़ा विषय है.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सभी भारतीय भाषाओं और साहित्य के विकास के लिए प्रतिबद्ध है. कुड़माली के साथ कुछ अन्य भाषाओं का मामला भी लंबित है और जल्द ही इस दिशा में पहल की जाएगी.
आठवीं अनुसूची में शामिल होने से क्या होगा फायदा?
कुड़माली भाषा का अपना समृद्ध साहित्य है. लोकगीत, लोककथाएं, कविताएं और मौखिक परंपराएं इसकी पहचान हैं. झुमर, टुसू, करम और छऊ जैसी सांस्कृतिक परंपराओं से भी इस भाषा का गहरा संबंध है.
सांसदों का कहना है कि आठवीं अनुसूची में शामिल होने के बाद भाषा और साहित्य के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा. इसके साथ ही शैक्षणिक और शोध कार्यों को भी नई दिशा मिलेगी. इससे कुड़माली भाषी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान को संस्थागत मान्यता मिल सकेगी.
इन सांसदों ने की गृह मंत्री से मुलाकात
गृह मंत्री से मुलाकात करने वालों में सांसद विद्युतवरण महतो, पुरुलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो, गिरिडीह के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी और राज्यसभा सांसद खीरू महतो शामिल थे.
