Dalma Cottage: 15 नये कॉटेज शुरू, 3500 रुपये में मॉडर्न सुविधा और फ्री ब्रेकफास्ट, ऑनलाइन बुकिंग शुरू

दलमा वन्यजीव अभयारण्य के माकुलाकोचा में 15 नए कॉटेज का उद्घाटन हुआ. अब पर्यटक ऑनलाइन बुकिंग कर घने जंगलों के बीच रात में ठहरने का आनंद ले सकेंगे.

अगर आप दलमा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो अब यहां सिर्फ दिनभर घूमकर लौटना नहीं पड़ेगा. दोस्तों या फैमिली के साथ टाइम बिताने का ये अच्छा मौका है. माकुलाकोचा में 15 नये मॉडर्न कॉटेज शुरू हो गये हैं, जहां टूरिस्ट अब रात में भी आराम से रुक सकेंगे. पहले यहां आने वाले ज्यादातर टूरिस्ट शाम होने से पहले जमशेदपुर या आसपास के इलाकों में लौट जाते थे, क्योंकि ठहरने की सुविधा नहीं थी.

3500 रुपये में बुक करें कॉटेज

इन कॉटेज की ऑनलाइन बुकिंग 3500 रुपये में होगी. इस शुल्क में टूरिस्ट को फ्री ब्रेकफास्ट मिलेगा. वहीं, लंच और डिनर के लिए परिसर में बने कैफेटेरिया में अलग से भुगतान कर अपनी पसंद का खाना खाया जा सकेगा. कॉटेज की बुकिंग झारखंड टूरिज्म और दलमा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी की वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन की जा सकती है.

जंगल के बीच ठहरने का अलग एक्सपीरियंस

माकुलाकोचा हाथियों के कॉरिडोर के पास स्थित है. ऐसे में यहां ठहरने वाले टूरिस्ट जंगल की शांति, हरियाली और वन्यजीवों की गतिविधियों को बेहद करीब से महसूस कर सकेंगे. कॉटेज इस तरह बनाये गये हैं कि जंगल के माहौल और जानवरों के आने-जाने पर कोई असर न पड़े.

पर्यटन बढ़ेगा, स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

राज्य के पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि इस सुविधा से दलमा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में टूरिस्ट की संख्या बढ़ेगी और आसपास के गांवों के युवाओं व महिलाओं के लिए रोजगार के नये अवसर भी बनेंगे. उन्होंने बताया कि अगले दो से तीन महीने में पिंड्राबेड़ा इलाके में भी 15 नये कॉटेज तैयार हो जाएंगे.

ईचागढ़ की विधायक सविता महतो ने कहा कि रात में ठहरने की सुविधा मिलने से नाइट टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय कारोबार को फायदा होगा. वहीं, घाटशिला के विधायक सोमेश चंद्र सोरेन ने कहा कि यह पहल पूरे कोल्हान में पर्यटन को नई पहचान देगी और दूर-दराज से आने वाले टूरिस्ट को भी आकर्षित करेगी.


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लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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