जमशेदपुर के को-ऑपरेटिव कॉलेज के शिक्षक का शव क्वार्टर से बरामद, मौत की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस

Jamshedpur Crime News: जमशेदपुर के को-ऑपरेटिव कॉलेज कैंपस में शिक्षक भीम राम का शव क्वार्टर से बरामद हुआ. बंद कमरे से शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई. पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव कब्जे में लिया और अब मौत के कारणों की जांच कर रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

जमशेदपुर से संजीव भारद्वाज की रिपोर्ट

Jamshedpur Crime News: झारखंड जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज कैंपस स्थित क्वार्टर में शनिवार को उस वक्त सनसनी फैल गई, जब कॉलेज के शिक्षक भीम राम (40) का शव उनके बंद कमरे से बरामद किया गया. बिष्टुपुर थाना पुलिस ने कमरे का दरवाजा तोड़कर शव को कब्जे में लिया. पुलिस अब इस संदेहास्पद मौत के पीछे की असली कहानी और सवालों के जवाब तलाशने में जुटी है.

शुक्रवार से बंद था दरवाजा, सोफे पर मिला शव

जानकारी के अनुसार, भीम राम के क्वार्टर का दरवाजा शुक्रवार से ही भीतर से बंद था. शनिवार को भी जब देर तक कोई हलचल नहीं हुई, तो आसपास के लोगों को अनहोनी की आशंका हुई. स्थानीय लोगों ने दरवाजे को खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई सुगबुगाहट नहीं मिलने पर तत्काल बिष्टुपुर पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस जब दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई, तो शिक्षक का शव सोफे पर पड़ा मिला.

पत्नी के निधन के बाद से थे गुमसुम

मूल रूप से बिहार के आरा जिले के बबुरा गांव के रहने वाले भीम राम पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में थे. बताया जा रहा है कि लगभग दो साल पहले उनकी पत्नी का निधन हो गया था, जिसके बाद से वे अक्सर गुमसुम रहने लगे थे. सहकर्मियों और करीबियों के बीच उनकी इस खामोशी को लेकर चर्चा थी.

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कई एंगल से जांच कर रही पुलिस

मृतक के शरीर पर चोट के कोई बाहरी निशान नहीं पाए गए हैं और न ही उनके मुंह से झाग निकलने जैसी कोई बात सामने आई है. आखिर मौत की वजह हार्ट अटैक है, कोई आंतरिक बीमारी या कुछ और? इसकी पुष्टि के लिए पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है. फिलहाल, पुलिस मामले की जांच हर संभावित एंगल से कर रही है ताकि मौत के सटीक कारणों का पता चल सके.

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Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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