बहरागोड़ा से ग्लोबल स्क्रीन तक, मानसिंह बास्के ने बढ़ाया झारखंड का मान

झारखंड के मानसिंह बास्के की दो फिल्मों का अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में चयन हुआ है. जानिए बहरागोड़ा से ग्लोबल स्क्रीन तक का उनका सफर.

दशमत सोरेन, जमशेदपुर

झारखंड की माटी के हुनर ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर अपनी चमक बिखेरी है. पूर्वी सिंहभूम बहरागोड़ा के बेनगारिया गांव के 29 वर्षीय युवा फिल्म निर्देशक मानसिंह बास्के ने अंतरराष्ट्रीय सिनेमा जगत में राज्य का नाम रोशन किया है. मानसिंह द्वारा निर्देशित फिल्म- "सारी सारजोम" और "व्हेयर डू द ट्रीज गो?" का चयन प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों के लिए हुआ है. "सारी सारजोम" जहां जर्मनी में आयोजित होने वाले 23वें इंडियन फिल्म फेस्टिवल स्टटगार्ट-2026 की शोभा बढ़ायेगी, वहीं स्पेन के इमेजिन इंडिया इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल मैड्रिड में भी मानसिंह की दोनों फिल्मों ने अपनी जगह सुरक्षित की है. इनमें से व्हेयर डू द ट्रीज गो?" को स्टूडेंट फिल्म कैटेगरी में विशेष रूप से नॉमिनेट किया गया है.

आदिवासी संघर्ष व मानवीय संवेदनाओं को दर्शाती अनूठी कहानियां

ये दोनों फिल्में अपनी दमदार विषयवस्तु के जरिये दर्शकों के दिलों को छूती है. फिल्म 'सारी सारजोम' ग्रामीण आदिवासी जीवन के जमीनी संघर्षों, उनके अधिकारों और उनकी सदियों पुरानी पारंपरिक मान्यताओं को बड़े पर्दे पर जीवंत करती है. वहीं, दूसरी ओर 'व्हेयर डू द ट्रीज गो?' एक बेहद संवेदनशील और भावनात्मक कहानी है. यह फिल्म एक ऐसे बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने एक नये परिवार के साथ तालमेल बिठाने और घुलने-मिलने का प्रयास कर रहा है, जहां वह पहली बार आया है और अब वही उसका स्थायी आशियाना बनने वाला है.

कलाकारों व तकनीकी टीम ने किया है बेहतर काम

इन बेहतरीन फिल्मों को मुकम्मल आकार देने में पर्दे के पीछे और आगे, दोनों ही टीमों ने शानदार काम किया है. 'सारी सारजोम' में रांची के अनुराग लुगुन और जमशेदपुर के सुकुमार टुडू के साथ मुंबई के कलाकार रेणुका, धर्मेंद्र, कैलाश व हर्ष ने मुख्य भूमिकाएं निभायी हैं. इसके सह-लेखक विदित होरो हैं, जबकि सायन मोदक (सिनेमेटोग्राफी), राज आनंद (एडिटिंग), युगल शर्मा (साउंड डिजाइन) और अर्पित व रॉबिन (प्रोडक्शन डिजाइन) ने तकनीकी कमान संभाली है. दूसरी तरफ, 'व्हेयर डू द ट्रीज गो?' के सह-लेखक ओमकार देशमुख हैं. इस फिल्म को दरवेश (सिनेमेटोग्राफी), राजेश (एडिटिंग), आनंदू (साउंड) और अनाखा (आर्ट व प्रोडक्शन डिजाइन) की टीम ने तकनीकी रूप से मजबूत बनाया है.

करीम सिटी कॉलेज से एफटीआइआइ तक का सफर

मानसिंह बास्के की यह अंतरराष्ट्रीय सफलता उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत और सिनेमा के प्रति अटूट लगन का प्रतिफल है. बहरागोड़ा के एक छोटे से गांव बेनगारिया से शुरुआत करके उन्होंने जमशेदपुर के करीम सिटी कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से सिनेमा स्टडीज में मास्टर्स की डिग्री हासिल की. सिनेमाई बारीकियों और निर्देशन के गुर सीखने के लिए उन्होंने भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (एफटीआइआइ), पुणे का रुख किया, जहां से उन्होंने निर्देशन का मेन कोर्स पूरा किया.

क्षेत्रीय संस्कृति को सहेजने के साथ हिंदी सिनेमा में भी बढ़ायी धमक

मानसिंह बास्के आज के दौर में उन गिने-चुने फिल्मकारों में शामिल हैं जो अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलते. वे वर्तमान में क्षेत्रीय भाषाओं के सिनेमा के माध्यम से अपनी संस्कृति, लोक-जीवन और स्थानीय मुद्दों को वैश्विक मंच प्रदान कर रहे हैं, और साथ ही वे हिंदी सिनेमा जगत में भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं. उनकी इस बड़ी वैश्विक उपलब्धि से न केवल बहरागोड़ा और जमशेदपुर, बल्कि पूरे झारखंड और देश का मान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा है, जो क्षेत्र के अन्य उभरते हुए युवा फिल्मकारों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है.


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लेखक के बारे में

Author: Dashmat Soren

Published by: Amleshnandan Sinha

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