किताबों से पहले पेड़ की छाल थी कागज, जमशेदपुर के इस यूनिवर्सिटी में आज भी दिखती है विरासत की लिखावट

डिजिटल युग में जमशेदपुर की विमेंस यूनिवर्सिटी एक अनूठी विरासत को सहेजे हुए है. यहां पेड़ की छाल पर लिखे प्राचीन संस्कार मंत्र आज भी इतिहास की गवाही दे रहे हैं, जो पुरानी लेखन परंपराओं को दर्शाते हैं.

जमशेदपुर : आधुनिक शिक्षा, डिजिटल क्लासरूम और तकनीक के दौर में जब पढ़ाई मोबाइल और कंप्यूटर की स्क्रीन तक सिमटती जा रही है, वहीं बिष्टुपुर में स्थित जमशेदपुर विमेंस यूनिवर्सिटी में इतिहास की एक अलग तस्वीर देखने को मिलती है. यहां संरक्षित पुरानी पांडुलिपियों में पेड़ की छाल जैसे प्राकृतिक माध्यम पर लिखे अक्षर आज भी अतीत की कहानी कहते नजर आते हैं.

ज्ञान को सुरक्षित रखने के लिए पेड़ की छाल का होता था प्रयोग

पांडुलिपि पर बारीक अक्षरों में हस्तलिखित सामग्री दर्ज है. नीचे रखे पन्नों और ऊपर की छालनुमा सामग्री को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि लिखने-पढ़ने की परंपरा है. पुराने समय में ज्ञान को सुरक्षित रखने के लिए पेड़ की छाल, ताड़पत्र और दूसरे प्राकृतिक माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था. इन पर स्याही या प्राकृतिक रंगों से अक्षर उकेरे जाते थे. यही वजह है कि ऐसी पांडुलिपियां केवल लिखित सामग्री नहीं, बल्कि उस दौर की जीवनशैली, भाषा, के रूप में शुरू हुई थी.

पेड़ की छाल पर लिखा संस्कार मंत्र.

पेड़ की छाल पर लिखा है संस्कार मंत्र

पांडुलिपि के साथ लगे परिचय-पत्र पर “Manuscript of Sanskar Mantra” लिखा हुआ है. इन पंक्तियों में तत्कालीन धार्मिक और संस्कार संबंधी ज्ञान को सुरक्षित रखने की परंपरा की झलक मिलती है. जन्म से लेकर जीवन के विभिन्न संस्कारों में बोले जाने वाले मंत्र, धार्मिक विधियों और परंपराओं का ज्ञान इसी तरह हस्तलिखित पांडुलिपियों के जरिए पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ता था.

क्या है संस्कार मंत्र

संस्कार मंत्र का अर्थ है संस्कार मंत्रों की हस्तलिखित पांडुलिपि. भारतीय परंपरा में ‘संस्कार’ जीवन के महत्वपूर्ण चरणों से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों को कहा जाता है. इन संस्कारों के दौरान बोले जाने वाले वैदिक मंत्रों, प्रार्थनाओं और विधि-विधानों को प्राचीन समय में कागज के बजाय पेड़ की छाल या भोजपत्र जैसे प्राकृतिक माध्यमों पर लिखकर सुरक्षित रखा जाता था. यह पांडुलिपि भी इसी प्राचीन लेखन परंपरा की याद दिलाती है. 

लाइब्रेरी में छात्राएं (फाइल फोटो).

क्या है वीमेंस यूनिवर्सिटी का इतिहास

जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी का इतिहास भी लंबा है. विश्वविद्यालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसकी यात्रा 1953 में जमशेदपुर वीमेंस कॉलेज के रूप में शुरू हुई थी और वर्ष 2019 में इसे विश्वविद्यालय का दर्जा मिला.

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लेखक के बारे में

By साहिल अस्थाना

साहिल अस्थाना पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पत्रकारिता के दौरान उन्होंने विभिन्न विषयों पर खबरों को कवर करते हुए जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग और समाचार लेखन का अनुभव हासिल किया है. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल से बतौर कंटेंट राइटर जुड़े हुए हैं. अपने वर्तमान कार्यक्षेत्र में वह मुख्य रूप से जमशेदपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं. समाचारों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है.

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