गालूडीह : प्रखंड की हेंदलजुड़ी पंचायत स्थित आमडांगा गांव में श्मशान घाट और नदी किनारे जाने वाली सड़क जर्जर थी. मौत के बाद भी अंतिम संस्कार के लिए जर्जर सड़क से होकर ग्रामीणों को जाना पड़ता था. ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क मरम्मत के लिए कई बार मनुहार की. बावजूद सड़क की मरम्मत नहीं हो सकी. कच्ची सड़क के दोनों ओर झाड़ियां उग जाने से रास्ता पूरी तरह संकरा हो गया था. ऐसे में ग्रामीणों के लिए पैदल चलना भी मुश्किल हो गया था. ग्रामीणों की मनुहार जब नहीं सुनी गई तो उन्होंने खुद ही सड़क बना दी. ग्रामीणों ने कहा - हम किसी के भरोसे में रहकर इंतजार नहीं करेंगे.
पार्थिव शरीर को श्मशान घाट ले जाने पर होती थी परेशानी
गांव में किसी व्यक्ति की मौत होने पर पार्थिव शरीर को श्मशान घाट तक ले जाने में सबसे अधिक परेशानी होती थी. समस्या से निजात दिलाने के लिए मंगलवार को ग्रामीणों ने एकजुट होकर श्रमदान किया. सड़क की साफ-सफाई व मरम्मत की. ग्रामीणों ने सड़क के दोनों ओर उगी झाड़ियों को हटाया. आवागमन योग्य बनाने का प्रयास किया. ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए यह महत्वपूर्ण रास्ता है, लेकिन लंबे समय से इसकी स्थिति खराब है.
बारिश में होती थी अधिक परेशानी
बारिश के दिनों में रास्ते की स्थिति और भी खराब हो जाती थी. ग्रामीणों ने बताया - कई बार सड़क की समस्या को लेकर संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों से ध्यान देने की मांग की. लेकिन, स्थायी समाधान नहीं हो सका. ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क पक्कीकरण कराने की मांग की है. श्रमदान में मुकेश माझी, बिमल माझी, प्रशांत माझी, बिपुल माझी, सुबीर धावड़िया, अमर माझी, प्रेम धावड़िया, रतन धावड़िया, शादीन रजक, अतिम माझी, तारापदो धावड़िया, आदित्य धावड़िया आदि का योगदान रहा.
