हॉस्टल में अवैध रूप से रह रहे इंटर्न पर होगी कार्रवाई

जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में अवैध रूप से रह रहे इंटर्न पर कार्रवाई की तैयारी है. कॉलेज प्रबंधन ने सुरक्षा के लिए हॉस्टल के नियमों को सख्त कर दिया है.

वरीय संवाददाता, जमशेदपुर

डिमना स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज परिसर के नर्सिंग हॉस्टल व बयॉज हॉस्टल में कई इंटर्न अवैध रूप से रह रहे हैं. उन सभी इंटर्न डॉक्टरों पर अब कार्रवाई करने की तैयारी शुरू कर दी गयी. शनिवार को अस्पताल प्रबंधन ने ऐसे इंटर्न की सूची जिला प्रशासन को सौंपते हुए उनसे तत्काल हॉस्टल खाली कराने का आग्रह किया. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ संजय कुमार के अनुसार कॉलेज परिसर में अनुशासन और सुरक्षा बनाये रखने के लिए अवैध कब्जा खत्म करना जरूरी है. प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नोटिस के बाद भी हॉस्टल खाली नहीं करने वालों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत दिये हैं. अस्पताल प्रबंधन का आरोप है कि लंबे समय से प्रशासनिक सहयोग नहीं मिलने के कारण हॉस्टल पर अवैध कब्जा बना हुआ है, जिससे कैंपस का माहौल लगातार प्रभावित हो रहा है. प्राचार्य ने बताया कि उनलोगों के लिए साकची शीतला मंदिर के पास डॉक्टर्स हॉस्टल बनाया गया है, लेकिन वे लोग वहां नहीं जाकर यहीं रह रहे हैं.

गर्ल्स हॉस्टल का शाम सात व बयॉज हॉस्टल का गेट रात 10 बजे हो जायेगा बंद

डिमना लेक के जलाशय में डूबने से दो जूनियर डॉक्टरों की मौत के बाद शनिवार को कॉलेज प्रबंधन ने हॉस्टल की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर बड़ा फैसला लिया है. शनिवार से गर्ल्स हॉस्टल का मुख्य गेट शाम 7 बजे और बयॉज हॉस्टल का गेट रात 10 बजे बंद कर दिया जायेगा. इसके बाद किसी भी छात्र, डॉक्टर या कर्मचारी को कॉलेज परिसर से बाहर जाना होगा, तो पहले वार्डेन की अनुमति लेनी होगी. साथ ही गार्ड पोस्ट पर नाम, पता, मोबाइल नंबर और कब लौटेंगे, इसकी पूरी जानकारी दर्ज करानी होगी. इस नियम को नहीं मानने वाले छात्र-छात्राओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी. इस संबंध में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार ने बताया कि नयी व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गयी है. इसकी जानकारी हॉस्टल में रहनेवाले सभी छात्रों, इंटर्न डॉक्टरों और कॉलेज परिसर में रहने वाले कर्मचारियों को दे दी गयी है. उन्होंने कहा कि हाल की दुखद घटना के बाद यह जरूरी हो गया था कि हॉस्टल और कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाये, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो. इतना ही नहीं नये गार्ड पोस्ट, वाहन पार्किंग और बैरिकेडिंग के लिए स्थान चिह्नित किये गये. कॉलेज परिसर में रहने वाले छात्रों, डॉक्टरों और कर्मचारियों के वाहनों के लिए अलग पार्किंग बनायी जायेगी. जो निर्धारित समय पर ही खुलेगी और बंद होगी. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में रहने वाले छात्र और इंटर्न डॉक्टर भविष्य के चिकित्सक हैं. उनका पहला दायित्व पढ़ाई, प्रशिक्षण और मरीजों की सेवा है. परिसर में अनुशासन और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था लागू की गयी है.


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By Chandra Shekhar

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