प्रमुख संवाददाता, जमशेदपुर : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड में जेपीएससी एवं जेएसएससी परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में राज्य सरकार से हस्तक्षेप करने की अपील की. जमशेदपुर परिसदन में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा - यह केवल 14वीं जेपीएससी परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि पिछले पांच-छह वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में लगातार अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में भी गंभीर स्तर की गड़बड़ियां हुई हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है. उन्होंने कहा कि जिस परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल को उत्तर प्रदेश में ब्लैकलिस्ट किया गया था और जिसे स्वयं जेपीएससी ने वर्ष 2025 में ब्लैकलिस्ट किया था, उसी एजेंसी को वर्ष 2026 में पुनः परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी दिए जाने से छात्रों के बीच अविश्वास पैदा हुआ है. उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की जायज मांगों पर विचार करते हुए 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द करनी चाहिए. पूरे मामले की जांच सीआइडी की बजाय सीबीआई से करानी चाहिए.
विपक्ष से किया सवाल - क्या झारखंड के छात्र देश के छात्र नहीं ?
रघुवर दास ने कहा कि दिल्ली में नीट परीक्षा के मामले पर विपक्षी दलों ने जिस तरह आवाज उठाई, उसी प्रकार झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर भी उन्हें संवेदनशील होना चाहिए. उन्होंने कांग्रेस, झामुमो, राजद, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी तथा वाम दलों से सवाल करते हुए कहा कि क्या झारखंड के छात्र देश के छात्र नहीं हैं। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से अपील की कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर भगवान बिरसा मुंडा की धरती पर आएं और आंदोलनरत छात्रों के दर्द को समझें. उन्होंने वर्ष 2024 की उत्पाद सिपाही भर्ती दौड़ के दौरान 19 अभ्यर्थियों की हुई असामयिक मौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परिवारों को भी न्याय और समुचित मुआवजा मिलना चाहिए.
बारिश के बावजूद छात्रों को तिरपाल लगाने की अनुमति नहीं
आंदोलनरत छात्रों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा - लगातार बारिश के बावजूद धरनास्थल पर छात्रों को तिरपाल लगाने तक की अनुमति नहीं दी जा रही है. लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है. उन्होंने जिला प्रशासन से धरनास्थल पर टेंट, पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार समय रहते छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कर समाधान नहीं निकालती है तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शीघ्र वार्ता कर आंदोलन का सम्मानजनक समाधान निकाला जाए,
उपचुनाव परिणामों पर बोले- स्थानीय मुद्दों का होता है प्रभाव
बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात के हालिया उपचुनावों पर प्रतिक्रिया देते हुए रघुवर दास ने कहा - उपचुनाव मुख्यतः स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं. इनके परिणामों से न राष्ट्रीय राजनीति प्रभावित होती है और न ही प्रदेश की राजनीति. उन्होंने कहा - जहां भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली है, वहां संगठन निश्चित रूप से आत्ममंथन करेगा. मध्यप्रदेश भाजपा और बिहार भाजपा के आला नेता इस रिजल्ट की समीक्षा कर अपना काम करेंगे.
अपने कार्यकाल का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा - वर्ष 2014 से 2019 के बीच डबल इंजन सरकार के दौरान लगभग 1.33 लाख सरकारी नियुक्तियां पूरी पारदर्शिता के साथ की गईं. उस अवधि में दरोगा, शिक्षक, वनरक्षी, महिला बटालियन, पहाड़िया बटालियन सहित अनेक भर्तियां समयबद्ध तरीके से हुईं. किसी भी परीक्षा में पेपर लीक या गंभीर अनियमितता का आरोप नहीं लगा. उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वच्छ और विश्वसनीय परीक्षा एजेंसियों के माध्यम से लगातार मॉनिटरिंग करते हुए भर्ती प्रक्रिया पूरी कराई. उनका दावा था कि यदि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी होती तो इतनी बड़ी संख्या में पारदर्शी नियुक्तियां संभव नहीं होतीं.
