शहर के नामकरण के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम के गवाह बनेंगे उपराष्ट्रपति

जमशेदपुर : टाटा स्टील अपने हर बड़े अवसर पर भव्य कार्यक्रम आयोजित कर उसे यादगार बनाती रही है. कंपनी की यह परंपरा बन चुकी है है कि बड़े आयोजन में अतिथि के तौर पर नामचीन हस्ती को बुलाया जाये. टाटा स्टील (पहले टिस्को) की 50वीं वर्षगांठ पर कंपनी ने शहर को जुबिली पार्क का तोहफा […]

जमशेदपुर : टाटा स्टील अपने हर बड़े अवसर पर भव्य कार्यक्रम आयोजित कर उसे यादगार बनाती रही है. कंपनी की यह परंपरा बन चुकी है है कि बड़े आयोजन में अतिथि के तौर पर नामचीन हस्ती को बुलाया जाये. टाटा स्टील (पहले टिस्को) की 50वीं वर्षगांठ पर कंपनी ने शहर को जुबिली पार्क का तोहफा दिया था.

उस कार्यक्रम में कंपनी ने प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया था. पंडित नेहरू ने जुबिली पार्क को शहरवासियों को उपहार के तौर पर सौंपते हुए पार्क में लगे टाटा जी की प्रतिमा स्थल से शहर वासियों को संबोधित किया था.
वहीं कंपनी के स्थापना की 100वीं वर्षगांठ पर वर्ष 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम कार्यक्रम में शामिल हुए थे. तब कंपनी के तत्कालीन एमडी बी मुत्थुरामन ने उनका स्वागत किया था. डॉ कलाम ने रूसी मोदी सेंटर फॉर एक्सीलेंस में टाटा स्टील के संस्थापक संग्रहालय का उद्घाटन किया था. जेआरडी टाटा स्पो‌र्ट्स काॅम्प्लेक्स में शताब्दी वर्ष की स्मृति में वट वृक्ष लगाया था. इस पौधे को बाद में जुबिली पार्क में स्थानांतरित किया गया था.
डॉ कलाम ने प्लांट का भी विजिट किया था और स्टीलेनियम हॉल में कार्यक्रम को संबोधित किया था. इसी कड़ी में कंपनी ने जमशेदपुर शहर के नामकरण के शताब्दी वर्ष पर उपराष्ट्रपति एम वेंकया नायडू को अतिथि के तौर पर बुलाया है. शहर का नाम कालीमाटी से बदल कर जमशेदपुर करने के पीछे की कहानी भी रोचक है. इसलिए कंपनी इसके सौ साल के कार्यक्रम को भी यादगार बनाना चाहती है. इस शताब्दी वर्ष कार्यक्रम के गवाह देश के उपराष्ट्रपति बनेंगे.

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