इंस्पेक्टर ने कोर्ट को अखिलेश सिंह की बेनामी संपत्ति की दी जानकारी
जमशेदपुर : गैंगेस्टर अखिलेश सिंह की संपत्ति से जुड़े जबलपुर से मिले कागजात मंगलवार को इंस्पेक्टर व अनुसंधानकर्ता अरविंद कुमार ने सीजेएम की कोर्ट में प्रस्तुत किये, लेकिन अखिलेश सिंह की पैरवी कर रहे अधिवक्ता विद्या सिंह ने कोर्ट में इस पर आपत्ति जाहिर की. अधिवक्ता ने बताया कि सृष्टि गार्डेन से अखिलेश सिंह की […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
जमशेदपुर : गैंगेस्टर अखिलेश सिंह की संपत्ति से जुड़े जबलपुर से मिले कागजात मंगलवार को इंस्पेक्टर व अनुसंधानकर्ता अरविंद कुमार ने सीजेएम की कोर्ट में प्रस्तुत किये, लेकिन अखिलेश सिंह की पैरवी कर रहे अधिवक्ता विद्या सिंह ने कोर्ट में इस पर आपत्ति जाहिर की. अधिवक्ता ने बताया कि सृष्टि गार्डेन से अखिलेश सिंह की संपत्ति से जुड़े कागजात के मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी.
चार्जशीट के साथ पुलिस ने कई कागजात भी दाखिल किये हैं, फिर यह नया कागजात बिना कोर्ट की अनुमति के कैसे जाम लिया जा सकता है. विद्या सिंह के अनुसार उनके द्वारा आपत्ति जताने पर कोर्ट ने कागजात लेने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कागजात जमा करने से पूर्व अर्जी दाखिल करने का निर्देश दिया है. सोमवार को इस मामले में इंस्पेक्टर अरविंद कुमार की कोर्ट में गवाही हुई थी, जिसमें उन्होंने कोर्ट को अखिलेश सिंह की बेनामी संपत्ति की जानकारी दी थी. मालूम हो कि पुलिस ने बिरसानगर स्थित सृष्टि गार्डेन में छापेमारी कर अखिलेश सिंह की संपत्ति से जुड़े कई कागजात बरामद किये थे. इस संबंध में बिरसानगर थाना में अखिलेश सिंह, उनकी पत्नी गरिमा सिंह समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी.
छापेमारी के बाद पुलिस ने बताया था कि अखिलेश सिंह ने छह राज्यों के कई शहरों में अरबों की प्रॉपर्टी बना रखी है. फर्जी नामों से मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में संपत्ति खरीदी है. पुलिस से बचने के लिए उसने पांच-पांच फर्जी नाम रखे, पत्नी गरिमा सिंह का नाम भी अन्नु सिंह कर दिया था. अखिलेश मध्य प्रदेश में संजय सिंह के नाम से जाना जाता है, तो दिल्ली में अरविंद शर्मा के नाम से. हरियाणा में दिलीप सिंह के नाम से प्रॉपर्टी ली है, तो उत्तराखंड में अजीत सिंह और उत्तर प्रदेश में मनोज कुमार सिंह के नाम से संपत्ति है. तत्कालीन एसएसपी अनूप टी मैथ्यू द्वारा अनुसंधान के लिए बनायी गयी टीम में इंस्पेक्टर अरविंद कुमार भी शामिल थे.