हीराचुनी, आदित्य झा : करीब 350 लोगों की आबादी वाले जमशेदपुर प्रखंड की बेलाजुड़ी पंचायत का हीराचुनी गांव, जिसे 22 अगस्त 2016 को जिला जनसंपर्क विभाग ने राज्य का पहला डिजिटल गांव घोषित किया था. लेकिन तीन साल बाद भी यहां की जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है.
4जी के जमाने में भी यह गांव 2जी नेटवर्क पर निर्भर है और वह भी सही से काम नहीं करता और न ही नियमित बिजली रहती है. ग्रामीणों ने बताया कि डिजिटल घोषित करने के बाद अधिकारी फिर से कभी गांव नहीं आये. 2जी नेटवर्क के भरोसे कुछ लोग सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं, लेकिन गांव को डिजिटल घोषित करने का उद्देश्य पूरा नहीं हो सका.
डिजिटल घोषित किया, पर जागरूक नहीं किया. जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज में हिंदी से एमए की पढ़ाई कर रहे गांव के साधन महतो ने बताया कि यहां 10-12 घंटे से भी कम बिजली रहती है.
अगर आंधी-बारिश हो जाये, तो हफ्ते भर तक बिजली का इंतजार करना पड़ता है. मोबाइल सेवाएं ठप हो जाती हैं. यहां 2जी नेटवर्क है. लेकिन वह भी सही से काम नहीं करता. गांव को डिजिटल घोषित कर दिया, पर यहां के ग्रामीणों को डिजिटलीकरण के बारे में नहीं बताया गया.
डिजिटल गांव का पहुंच पथ भी जर्जर. ग्रामीणों ने बताया, अधिकारियों ने कहा था कि डिजिटल होने के बाद गांव का विकास होगा. लेकिन अब तक गांव का पहुंच पथ जर्जर है. इसी से गांव के विकास का अंदाजा लगाया जा सकता है. गांव की 95 प्रतिशत आबादी शिक्षित है. यदि लोगों को डिजिटलीकरण के बारे में सही से बताया जाता, तो इसका उद्देश्य पूरा हो जाता.
हर परिवार की मेल आइडी व वाट्सएप नंबर
डिजिटल अभियान के तहत गांव के सभी परिवारों के मुखिया या फिर परिवार के शिक्षित सदस्य के नाम ई-मेल आइडी बनाये गये थे, लेकिन जागरुकता के अभाव में कुछ लोग ही इसका प्रयोग कर रहे हैं. गांव के सभी घरों पर डिजिटल गांव हीराचुनी लिखा बोर्ड लगाया गया था, जिस पर उस परिवार के मुखिया का ई-मेल आइडी और वाट्सएप नंबर अंकित है.
ब्लॉग, फेसबुक पेज नहीं हाेता अपडेट
‘डिजिटल हीराचुनी’ के नाम से फेसबुक पेज बनाया गया था, जिसका उद्देश्य गांव की गतिविधियों को लोगों तक पहुंचाना था. लेकिन इस पेज पर एक दिसंबर 2018 को एक बांग्ला गाना अपडेट किया गया. इससे पहले गुड मॉर्निंग और ताजमहल की तस्वीर अपडेट की गयी थी.
ब्लॉग को 30 अगस्त 2016 को लास्ट अपडेट किया गया है, जिसमें गांव में स्वच्छता अभियान संचालन की जानकारी दी गयी है. हालांकि वाट्सएप ग्रुप में गांव की गतिविधियों के बारे में कुछ जानकारी साझा की जाती है.
