बुजुर्ग बंदी जेल प्रशासन के लिए बने चुनौती

जमशेदपुर: 21 हार्डकोर नक्सली सहित 50 दुर्दात कैदियों (बंदियों) से भरे घाघीडीह सेंट्रल जेल में इन दिनों बुजुर्ग कैदियों की संख्या ने जेल प्रशासन के लिए नयी चुनौती पैदा कर दी है. जेल में 50 से ज्यादा बुजुर्ग कैदी हैं जिनकी उम्र 60 साल से ज्यादा है. अधिक उम्र की वजह से कई तो शारीरिक […]

जमशेदपुर: 21 हार्डकोर नक्सली सहित 50 दुर्दात कैदियों (बंदियों) से भरे घाघीडीह सेंट्रल जेल में इन दिनों बुजुर्ग कैदियों की संख्या ने जेल प्रशासन के लिए नयी चुनौती पैदा कर दी है. जेल में 50 से ज्यादा बुजुर्ग कैदी हैं जिनकी उम्र 60 साल से ज्यादा है.

अधिक उम्र की वजह से कई तो शारीरिक रूप से एकदम कमजोर हो गये हैं. यहां तक कि उन्हें उठाने- बैठाने तक के लिए जेल प्रशासन को दूसरे कैदियों या बंदी रक्षकों की मदद लेनी पड़ती है. कई कैदी डायबिटीज, डिमेंशिया या दिल की बीमारी से पीड़ित हैं. युवा कैदियों की तुलना में जेल प्रशासन को उन पर अलग से ध्यान देना पड़ता है. ये कैदी महज इसलिए सलाखों के पीछे दिन काट रहे हैं क्योंकि इनकी रिहाई में कभी सरकारी नियम तो कभी परिजनों की उपेक्षा आड़े आ रही है.

अस्पताल भेजने की प्रक्रिया जटिल. बीमार बंदी को इलाज के लिए जेल से एमजीएम अस्पताल भेजने की प्रक्रिया काफी जटिल है. जब तक अनुमति मिलती है तब तक बंदी की जान जाने की नौबत आ जाती है या वे अपने हाल पर किसी तरीके से ठीक हो जाता है. जेल अस्पताल के एक बड़े हिस्से में इन्हीं का इलाज चलता रहता है. इन बंदियों के इलाज में भी जेल प्रशासन को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

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