संजीव भारद्वाज, जमशेदपुर
जीएसटी में कराेड़ाें रुपये का आइटीसी फ्रॉड करने के 18 मामलाें की जांच सीआइडी काे साैंपी जायेगी. वाणिज्य कर विभाग ने 18 कंपनियाें के निदेशक व फर्म के खिलाफ संबंधित थानाें में प्राथमिकी दर्ज करायी है, लेकिन पुलिस की ओर से अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी है. इस कारण वाणिज्य कर विभाग के वरीय अधिकारियाें ने इन मामलाें काे सीआइडी के सुपुर्द करने का फैसला किया है.
इसके अलावा भविष्य में आइटीसी फ्रॉड के मामलाें में किसी तरह की प्राथमिकी थाने में नहीं दर्ज कराने की भी निर्देश सभी वाणिज्य कर अधिकारियाें काे दिया है. आइटीसी फ्रॉड की सूचना मिलने पर इसकी विधिवत जानकारी जिला दंडाधिकारी काे उपलब्ध करायी जायेगी.
वाणिज्य कर अधिकारियाें ने बताया, मामला दर्ज कराने के बाद विभाग के पास किसी तरह की कार्रवाई का अधिकार नहीं रह जाता है. इन मामलाें में आज तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हाे पायी है. पुलिस ने मामला दर्ज कर उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया है.
अपर मुख्य सचिव ने लिखा है पत्र
वाणिज्य कर विभाग के अपर मुख्य सचिव केके खंडेलवाल ने जमशेदपुर, रांची, धनबाद, बाेकाराे आैर देवघर के उपायुक्त, एसएसपी-एसपी काे पत्र लिखकर मामलाें का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने व आइटीसी फ्रॉड करनेवाले व्यवसायियाें के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने की मांग की थी.
केके खंडेलवाल ने अपने पत्र में लिखा कि कतिपय व्यवसायियों द्वारा अवैध व फर्जी कागजात के आधार पर वैट और जीएसटी के अंतर्गत निबंधन प्राप्त कर झारखंड मूल्यवर्धित कर अधिनियम 2005 व झारखंड माल सेवा कर अधिनियम 2017 के प्रावधानाें के विपरीत गलत आइटीसी का दावा कर विवरणी दाखिल की गयी है. फर्जी आइटीसी की आधार के आधार पर कराेड़ाें रुपये के राजस्व की क्षति पहुंचायी गयी है. जांच के उपरांत संबंधित व्यवसायियाें के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है.
पुलिस नहीं कर रही है मामलाें में कार्रवाई
नये मामलों की प्राथमिकी दर्ज नहीं करायेगा विभाग
