जमशेदपुर : साइबर ठगों से बैंक खाते को बचाना चुनौती, किसी को भी न बतायें ओटीपी

निखिल सिन्हा जमशेदपुर : कैशलेस को बढ़ावा मिलने से जहां बड़े पैमाने पर रुपये का लेनदेन एटीएम और अन्य कार्ड से होने लगा है. वहीं साइबर अपराधी अलग-अलग तरीके से बैंक खाते में सेंध लगा कर खाताधारकों की गाढ़ी कमाई उड़ा ले रहे हैं. ऐसे में बैंक खाते की गोपनीयता बरकरार रखना और साइबर अपराधियों […]

निखिल सिन्हा
जमशेदपुर : कैशलेस को बढ़ावा मिलने से जहां बड़े पैमाने पर रुपये का लेनदेन एटीएम और अन्य कार्ड से होने लगा है. वहीं साइबर अपराधी अलग-अलग तरीके से बैंक खाते में सेंध लगा कर खाताधारकों की गाढ़ी कमाई उड़ा ले रहे हैं.
ऐसे में बैंक खाते की गोपनीयता बरकरार रखना और साइबर अपराधियों तक पहुंच कर उन्हें गिरफ्तार करना दिनों-दिन चुनौती बनती जा रही है. हैकर्स नित नये तरीके अपना कर खाताधारकों को अपने झांसे में लेकर उनके बैंक खाते खाली कर दे रहे हैं. यहां तक की एटीएम से भी छेड़छाड़ कर ग्राहकों के खाते से पैसे निकाले जा रहे हैं.
हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आये हैं, जिनमें बिना फोन किये या ओटीपी जाने ही खाते से लाखों रुपये की निकासी कर ली गयी.
ऐसे में बैंक खाता धारक परेशान हैं. दो-तीन दिन पूर्व ही बिना ओटीपी जाने ही पूर्व आइएएस अधिकारी के खाते से 78 हजार रुपये की निकासी कर ली गयी. उन्हें जानकारी तब हुई, जब वह अपना पासबुक अपडेट कराने के लिए बैंक पहुंचे. ऐसी घटनाओं के बाद साइबर थाने में लगातार केस दर्ज हो रहे हैं. हाल ही में पुलिस ने कुछ साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा है. कुछ लोगों के रुपये भी पुलिस ने वापस करवाये हैं. लेकिन ठग गिरोहों की गतिविधियों में तनिक भी कमी नहीं आयी है.
एटीएम के सेंसर से करते है छेड़छाड़ : साइबर अपराधी ओटीपी के अलावा रुपये निकालने के लिए एटीएम की सेंसर से छेड़छाड़ करते हैं.
सेंसर से छेड़छाड़ के बाद एटीएम कार्ड का पूरा डिटेल अपराधी हैक कर अपने कंप्यूटर में अपलोड कर लेते हैं. इसके बाद एटीएम कार्ड की क्लोनिंग कर कार्ड वाले खाते से रुपये की निकासी कर लेते हैं. क्रेडिट कार्ड के पासवर्ड का पता करने के बाद मॉल या दुकान से खरीदारी कर लेते हैं. इसके अलावा गिरोह के सदस्य एटीएम बूथ पर खड़े होकर ऑपरेट करने वाले उपभोक्ता के एटीएम पिन कोड को स्कैन कर लेते हैं. उसके बाद एटीएम क्लोन कर खाता से रुपये की निकासी कर लेते हैं.
क्या करें आम उपभोक्ता
एटीएम कार्ड नंबर और उसका पासवर्ड किसी से साझा नहीं करें.
एटीएम से रुपये निकालने के दौरान आसपास किसी की उपस्थिति न हो इसका ध्यान रखें.
फोन पर किसी भी व्यक्ति से बैंक खाता से संबंधित किसी भी प्रकार की कोई भी जानकारी शेयर न करें.
एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड के गुम होने के साथ ही बैंक को सूचित कर उसे लॉक करायें.
समय-समय पर एटीएम का पासवर्ड बदलते रहें.
एटीएम से रुपये की निकासी के बाद कैंसल बटन जरूर दबायें.
एटीएम में प्रवेश करने के बाद गुप्त कैमरे के बारे में जानकारी प्राप्त करें.
ज्यादा सुनसान वाले एटीएम का प्रयोग न करें.
सुरक्षा गार्ड वाले एटीएम का ही प्रयोग करें.
केस 1
8 मार्च 2018 : एनएमएल वैज्ञानिक अरुण दास के खाते से 6.40 लाख रुपये की निकासी हो गयी थी. उनका एटीएम कार्ड घर पर था. उन्हें किसी ने कॉल भी नहीं किया था. बर्मामाइंस थाना में केस दर्ज कराया गया था.
केस 3
1 जून 2018 : डिमना रोड निवासी अजय शर्मा के बैंक खाते से 50 हजार की निकासी कर ली गयी. उनका एटीएम उनके पास था. न ही फोन पर कोई ओटीपी आया था. उन्होंने उलीडीह थाना मेें केस दर्ज कराया था.
केस 2
30 मई 2018 : मानगो की शांति देवी के खाते से 29 हजार रुपये की निकासी हो गयी. जब रुपये की निकासी हुई, उस वक्त एटीएम कार्ड महिला के पर्स में था. महिला ने मानगो थाना में केस दर्ज कराया था.
केस 4
3 नवंबर 2018 : कोलकाता की मुकुंदपुर निवासी विनीता से 26 हजार की ठगी हो गयी. वह जमशेदपुर आयी थी. घटना के दिन सुबह एक कॉल आयी. काॅल करने वाले ने अकाउंट नंबर बताया और एटीएम एक्टिवेट के नाम पर उनके खाते से रुपये की निकासी कर ली.
साइबर अपराधियों को पकड़ने के लिए जमशेदपुर में साइबर थाना बनाया गया है. यहां प्रशिक्षित डीएसपी स्तर के अधिकारी हैं. साइबर थाने की टीम दर्ज मामलों के आरोपियों को पकड़ती है. कुछ मामलों का पुलिस ने उद्भेदन भी किया है. दर्ज सभी मामलों पर पुलिस गंभीरता से काम कर रही है.
अनूप बिरथरे, एसएसपी, पूर्वी सिंहभूम
बिना ओटीपी व फोन कॉल के निकल जा रहे हैं रुपये
साइबर अपराधी पहले बैंक अधिकारी बन कर उपभोक्ताओं को फोन कर उनके एटीएम कार्ड के बंद होने और आधार नंबर लिंक कराने की बात कह कर झांसे में लेते थे. इसके बाद खाते की डिटेल और ओटीपी ले लेते थे और रुपये की निकासी हो जाती थी. लेकिन हाल के दिनों ने बिना ओटीपी जाने और फोन कॉल किये ही खाते से रुपये की निकासी कर ली जा रही है. उपभोक्ता को जानकारी तब होती है जब उनके मोबाइल नंबर पर रुपये की निकासी का संदेश आता है. जब तक उपभोक्ता अपने बैंक खाता को बंद कराते हैं, तब तक उनके बैंक खाता से काफी रुपये निकाले जा चुके होते हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >