आधार आउट, डीबीटी होगा लागू

जमशेदपुर: रसोई गैस सिलिंडरों के लिए डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर स्कीम (डीबीटी) यानी नकद भुगतान योजना की शुरुआत फिर से हो सकती है. इस योजना से आधार को बाहर कर एक बार फिर इसका प्रारूप तैयार किया जा रहा है. ऐसी स्थिति में रसोई गैस के उपभोक्ताओं को एक बार फिर नन सब्सिडी रेट-अधिक दाम पर […]

जमशेदपुर: रसोई गैस सिलिंडरों के लिए डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर स्कीम (डीबीटी) यानी नकद भुगतान योजना की शुरुआत फिर से हो सकती है. इस योजना से आधार को बाहर कर एक बार फिर इसका प्रारूप तैयार किया जा रहा है. ऐसी स्थिति में रसोई गैस के उपभोक्ताओं को एक बार फिर नन सब्सिडी रेट-अधिक दाम पर गैस सिलिंडर की खरीद के लिए तैयार रहना होगा.

यह बात अलग है कि बाद में सब्सिडी वाला पैसा उनके बैंक खाते में पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा भेज दिया जायेगा. भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को रोकने के लिए डीबीटी स्कीम को फायदेमंद बताया जा रहा है. विभाग का मानना है कि नकद भुगतान योजना को बैंकों के माध्यम से चलाये जाने से वित्तीय संस्थान मजबूत होंगे. पेट्रोलियम विभाग से पैसा बैंकों में जायेगा, जिसके कुछ दिन बाद पैसा उपभोक्ता के पास जायेगा. ऐसी स्थिति में वैसे खातों में भी पैसा जमा होना शुरू हो जायेगा, जिन्हें बैंकों ने बड़े स्तर पर जीरो बैंलेंस के आधार पर खोला था और वे बिना किसी लेन के पड़े हैं. इस पैसे का इस्तेमाल बैंक भी करता रहेगा. जमशेदपुर में आजसू पार्टी महानगर अध्यक्ष द्वारा इस योजना का यह कहते हुए विरोध किया गया था कि सब्सिडीवाले रेट का सिलिंडर खरीदने में लोगों को इतनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, तो वे महंगा सिलिंडर खरीदने के लिए पैसे कहां से जुगाड़ करेंगे.

आधार को जोड़ने से स्कीम हो गयी थी बेकार
आधार को अनिवार्य कर दिये जाने के कारण डीबीटी स्कीम बेकार साबित होती दिख रही थी. जिनके पास आधार था वे अधिक दाम चुका कर सिलिंडर खरीदते थे और फिर अपना ही पैसा वापस पाते थे, जिनके पास आधार नहीं था, वे सब्सिडीवाले रेट पर ही सिलिंडर प्राप्त कर लेते थे. सरकार का नियम माननेवालों को अपने ही पैसों की वापसी के लिए बैंकों से लगातार संपर्क में रहना पड़ता था. सरकार द्वारा आधार कार्ड बनाने के लिए बड़े स्तर पर व्यवस्था भी नहीं की गयी, जिसके कारण अधिकांश लोगों के कार्ड नहीं बन पाये.

सभी का बनेगा आधार, तो योजना होगी साकार
जमशेदपुर रसोई गैस एसोसिएशन के प्रवक्ता तारा चंद्र अग्रवाल ने कहा कि सभी उपभोक्ताओं का आधार कार्ड यदि बन जाये तो योजना साकार हो सकती है. कुछ उपभोक्ताओं के पास आधार कार्ड का होना, कुछ के पास नहीं होना विसंगतियों की स्थिति पैदा करता है.

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