जमशेदपुर : एमसीआइ की टीम सोमवार को एमबीबीएस की 100 सीटों पर नामांकन को लेकर व्यवस्था में क्या-क्या सुधार किया गया, इसकी जांच को एमजीएम पहुंची. जांच में टीम के सदस्यों को एमजीएम अस्पताल और कॉलेज में कई खामियां मिली.
एमसीआइ की तीन सदस्यीय टीम सबसे पहले एमजीएम कॉलेज पहुंची. वहां से टीम के दो सदस्य डॉ रवींद्रनाथ साहा व डॉ जगन्नाथ नायक अस्पताल आ गये, वहीं, डॉ मीरा एमजीएम मेडिकल कॉलेज में कॉलेज के डॉक्यूमेंटेशन से संबंधित जानकारी लेने के साथ-साथ सभी दस्तावेजों की छानबीन की. इस दौरान टीम के सदस्यों ने 10 घंटे तक मानक अौर मौजूदा आधारभूत संरचना, मैनपावर, मशीनरी, सर्जरी, रिसर्च, इलाज की सुविधा आदि की जमीनी स्थिति को देखा.
सूत्रों के अनुसार जांच के बाद एमसीआइ की टीम ने जो रिपोर्ट तैयार की है, उसमें अस्पताल अौर कॉलेज में मिली खामियों का जिक्र किया गया है, जिसमें बताया गया है कि एक सौ सीटों पर नामांकन के लिए मानक के अनुरूप अल्ट्रासाउंड, सिटी स्कैन, एक्सरे समेत अन्य अत्याधुनिक मशीनों की खरीद नहीं की गयी.
हालांकि एमजीएम अधीक्षक व प्राचार्य ने खरीदारी के लिए नियमानुसार टेंडर कर दिये जाने की बात कही. इसके साथ ही टीम ने मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजीडेंट, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, रेजीडेंट डॉक्टर की कमी भी पायी. निरीक्षण के दौरान एमजीएम के अधीक्षक डॉ एसएन झा, नकुल प्रसाद चौधरी, प्राचार्य डॉ एसी अखौरी, डॉ विनीता साह, डॉ दिवाकर हांसदा, हीरालाल मुर्मू, डॉ ललित मिंज, डॉ निर्मल कुमार के अलावा सभी विभाग के विभागाध्यक्ष मौजूद थे.
आज तय होगा मेडिकल कॉलेज की 100 सीटों का भविष्य
एमजीएम मेडिकल कॉलेज में 100 सीटों पर एडमिशन हो सकेगा या नहीं यह मंगलवार को तय हो जायेगा. कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 25 सितंबर को सुनवाई करने की तिथि तय की थी. एमसीआइ की टीम के दौरे के दौरान जो कुछ भी बातें उभर कर सामने आयी है, उससे संबंधित रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करेगी.
जबकि दूसरी अोर राज्य के मुख्य सचिव भी सरकार का पक्ष सुप्रीम कोर्ट के सामने प्रस्तुत करेंगे. जिसमें यह बताया जायेगा कि उन्होंने कॉलेज में 100 सीटों पर एडमिशन को लेकर क्या-क्या कदम उठाये हैं, इससे संबंधित जानकारी प्रस्तुत की जायेगी. गौरतलब है कि करीब तीन महीने पूर्व आधारभूत संरचनाअों के साथ ही शिक्षकों की कमी की वजह से एमजीएम मेडिकल कॉलेज समेत देश के मेडिकल कॉलेजों के कुल 1600 सीटों में कटौती कर दी गयी थी.
लेकिन इस मामले में एमजीएम मेडिकल कॉलेज के साथ ही बिहार व उत्तर प्रदेश के कॉलेजों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने में व्यवस्था सुधारने का सशर्त समय दिया था. इस समय में समस्याअों को दूर कर लेने से संबंधित मुख्य सचिव ने अंडरटेकिंग भी दिया था. तीन महीने में कितनी समस्याएं दूर हो सकी है, यह 25 सितंबर को तय हो पायेगा. तीन महीने पहले जब एमसीआइ की टीम एमजीएम आयी थी, तो 28 बिंदुओं पर सुधार करने की जरूरत बतायी थी.
