जमशेदपुर: बिहार से झारखंड के अलग हुए करीब 14 वर्ष हो गये, लेकिन अभी भी दोनों राज्यों के बीच कई परिसंपत्तियों का बंटवारा नहीं हुआ है. आलम यह है कि झारखंड के संसाधन से बिहार सरकार आय कर रही है, वहीं अपने संसाधन से मिलने वाली सुविधाओं के लिए राज्य सरकार को राशि खर्च करनी पड़ रही है.
बिहार स्टेट हाइड्रो इलेक्ट्रिकल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएसएचइपीसीएल) चांडिल डैम पर 1987 में बनाये गये हाइडल पावर प्रोजेक्ट का काम फिर से शुरू करने जा रहा है. परियोजना के तहत सुवर्णरेखा परियोजना के कैनाल से आने वाले जल प्रवाह का इस्तेमाल बिजली के उत्पादन के लिए किया जाना है.
झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड ने परियोजना के लिए सितंबर, 2012 में कॉरपोरेशन को पांच करोड़ रुपये की राशि दी थी. वहीं बोर्ड ने बिजली खरीदारी के लिए भी अपनी रजामंदी दी है. बिहार सरकार के अधीन ही यह कॉरपोरेशन संचालित हो रहा है. ऐसे में झारखंड के संसाधनों का इस्तेमाल किया जायेगा. और उससे मिलने वाली बिजली के लिए सरकार को ही राशि खर्च करनी होगी.
बीएसएचइपीसीएल के अधीन झारखंड में कई परियोजनाएं: बिहार स्टेट हाइड्रो इलेक्ट्रिकल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधीन झारखंड में कई परियोजनाओं का संचालन हो रहा है. इसमें चांडिल डैम हाइडल पावर, पलामू के नार्थ कोयल हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट, गिरिडीह तेनु-बोकारो लिंक कैनाल, गुमला स्थित सदानी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट, पलामू के लोअर घाघरी मिनी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट, नेतरहाट स्थित स्मॉल हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट, लोहरदग्गा स्थित निनदीघाघ डेमो हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट, गुमला स्थित जालिमघाघ डेमो हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट शामिल है, जिस पर काम किया जाना है.
