जमशेदपुर : शहर के बीच में स्थित धतकीडीह हरिजन (एससी) बाहुल्य बस्ती है. इसकी आबादी करीब 25 हजार है. लेकिन सरकारी सुविधाओं के नाम पर बस्ती हाशिये पर है. 110 साल पहले इस बस्ती की नींव रखी गयी थी. पूरे शहर की साफ-सफाई में अहम योगदान देने वाले अधिकांश लोग इस बस्ती में रहते हैं.
इस बस्ती के मात्र 10 लोग टाटा स्टील में काम करते हैं. बाकी परिवार दैनिक मजदूरी कर जीविकोपार्जन करता है. यहां मात्र 20 लोगों का ही राशन कार्ड बना है. बच्चों को शिक्षा देने के लिए ठक्कर बापा मध्य एवं उच्च स्कूल है. उसको भी बंद करने की बात कही जा रही है. हरिजन समाज के लोगों को टाटा कंपनी ने बहुत साल पहले क्वार्टर व फ्लैट बनाकर दिया था. उसमें 500 परिवर रहते हैं. बस्ती में 1900 झुग्गी-झोपड़ियां हैं. यहां सरकारी स्वास्थ्य सुविधा नहीं है. यही हाल शहर की अन्य हरिजन बस्तियों का भी है.
बच्चों को नहीं मिल रही छात्रवृत्ति. धतकीडीह बस्ती में रहने वाले स्कूली बच्चों को छात्रवृत्ति नहीं मिलती है. क्योंकि इनके पास अनुसूचित जाति का जाति प्रमाण पत्र नहीं है. अंचल कार्यालय जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए उनसे जमीन का खतियान की मांग करता है. खतियान नहीं होने की वजह से उनका जाति प्रमाण पर निर्गत नहीं हो रहा है. यही वजह है कि इन्हें सरकारी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं.
महात्मा गांधी भी आये थे बस्ती में. देश आजाद होने से पूर्व महात्मा गांधी धतकीडीह हरिजन बस्ती में आये थे. ठक्कर बापा क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे. वे बस्तीवासियों से मिलकर उनकी समस्याओं से मुखातिब हुए थे. इस बस्ती में दिवंगत संजय गांधी में भी आ चुके हैं. यहां कई मंत्री व विधायक समय-समय पर आते रहे हैं.
जिले में नहीं हैं एक भी एससी छात्रावास. पूर्वी सिंहभूम जिले में अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए एक भी छात्रावास नहीं है. 90 प्रतिशत आबादी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. वे बहुत मुश्किल से जीविकोपार्जन कर रहे हैं. समाज की शैक्षणिक स्थिति दिनों-दिन बदतर होती जा रही है.
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