जमशेदपुर : आरा निवासी निर्मल सिंह की एमजीएम अस्पताल में स्थिति काफी खराब है. उसका दोनों पैर टूटा हुआ है. किसी तहत घसीट कर चल रहा है. उसके पास इतना पैसा नहीं है कि वह आरा अपने घर जा सकें. वह छह माह से एमजीएम में किसी तरह घूम कर लोगों से मदद मांग रहा है. लेकिन उसको मदद देने वाला कोई नहीं मिला.
अस्पताल में अगर कोई खाना दे देता है तो खा लेता है नहीं तो भूखे ही अस्पताल परिसर में सो जाता है. जो कोई मिलता है उसको हाथ जोड़ कर कहता है कि मुझे आरा पहुंचवा दो. निर्मल ने बताया कि वह 29 अक्तूबर 2017 को आरा से काम की तलाश में जमशेदपुर पहुंचा था. उसे आदित्यपुर आरआईटी मोड़ के पास एक क्रशर कंपनी में नौकरी मिली. छह नवंबर को वह नाइट ड्यूटी कर घर लौट रहा था. उसी दौरान एक क्रेन ने धक्का मार दिया. जिससे दोनों पैर टूट गये. बाद में क्रेन ड्राइवर ने निर्मल को एमजीएम में भर्ती कराया.
कई दिनों तक उसका हाल-खबर लेता रहा, पर दो माह पूर्व जब निर्मल को अस्पताल से छुट्टी मिली, तो ड्राइवर छोड़ दिया. अब निर्मल के पास न तो खाने का ठिकाना है और न रहने का. वह अस्पताल में हर आने-जाने वाले से कभी खाना तो कभी कपड़े तो कभी घर पहुंचाने की दुहाई लगाता रहता है.
