नीमडीह : अखिल भारतीय आदिवासी भूमिज मुंडा समाज द्वारा भांगाट आम बागान मैदान में आयोजित तीन दिवसीय महासम्मेलन का रविवार को समापन हो गया. अंतिम दिन सम्मेलन में करीब 20 हजार महिला-पुुरुष को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि आदिवासी भूमिज-मुंडा जाति सिंहबोंगा (सूर्य देवता) एवं प्रकृति के उपासक हैं.
भूमिज-मुंडा समाज की सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता से भी पूर्व की है. हमारी भाषा झारखंड से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक प्रचलित है. हमारा समाज प्रारंभ से ही स्वतंत्रता प्रेमी रहा है. हमारे वीर योद्धा गंगानारायण सिंह, भगवान बिरसा मुंडा आदि महान आंदोलनकारियों के नाम स्वाधीन संग्राम के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हैं. इससे यह साबित होती है कि हमारे पूर्वज अन्याय-अत्याचार सहन नहीं करते थे. हमारे पूर्वजों ने स्वाधीनता संग्राम में खून बहा कर मातृभूमि का कर्ज चुकाने का प्रयास किया. उनके दिखाये मार्ग व आदर्श पर हमें चलने की जरूरत है.
श्री मुंडा ने कहा कि संगठन में शक्ति है. हमें भी संगठित होकर समाज हित में कार्य करना होगा. इससे पूर्व श्री मुंडा ने समाज के वीर शहीदों को नमन कर एवं दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया. इस अवसर पर पूर्व न्यायाधीश जतिंद्रनाथ सिंह, धरनीधर सिंह मुंडा, कुकड़ू प्रमुख संतोषी सिंह मुंडा, भोलानाथ सिंह, असित सिंह पात्र, पूर्व प्रमुख लक्ष्मी सिंह, जिप सदस्य माधव सिंह मानकी, सुधाकर सिंह, मुखिया सुलोचना देवी, आदि उपस्थित थे
