ऊंचे दाम पर बिक रही किताब, कॉपी व ड्रेस की होगी जांच, शिक्षा सचिव ने दिया आदेश

अभिभावकों को सीधे जेट में शिकायत करने की अपील, कहा विभाग नियमानुसार लोगों के हक के साथ खड़ा रहेगा जमशेदपुर : जमशेदपुर के प्राइवेट स्कूलों की ओर से धड़ल्ले से बेचे जा रहे कॉपी, किताब और ड्रेस की कीमतों के भारी-भरकम दाम ने झारखंड सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को झकझोर कर रख […]

अभिभावकों को सीधे जेट में शिकायत करने की अपील, कहा विभाग नियमानुसार लोगों के हक के साथ खड़ा रहेगा

जमशेदपुर : जमशेदपुर के प्राइवेट स्कूलों की ओर से धड़ल्ले से बेचे जा रहे कॉपी, किताब और ड्रेस की कीमतों के भारी-भरकम दाम ने झारखंड सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को झकझोर कर रख दिया है.
प्रधान सचिव अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने स्कूलों में वसूली जा रही किताबों की कीमत एवं मनमानी फीस वृद्धि के मामले की जिला शिक्षा पदाधिकारी अारकेपी सिंह को जांच कर अपनी रिपोर्ट भेजने के लिए कहा है. विभाग को शिकायत मिली है कि नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत मान्यता के प्रावधानों के अंतर्गत प्राइवेट स्कूलों को हर वर्ष अपने आय-व्यय, छात्र संख्या एवं संसाधनों का ब्यौरा देना है. अधिकांश निजी स्कूल संबंधित नियमों का अनुपालन नहीं कर रहे. इसके अलावा कई विद्यालय सरकार की भूमि पर संचालित होने के बावजूद नियमों को दरकिनार कर आम लोगों से शिक्षा के नाम पर मोटी कमाई कर रहे हैं. शिक्षा सचिव ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से इस मामले में पूरा ब्यौरा देने को कहा है. निजी स्कूलाें की ओर से धड़ल्ले से बढ़ाई जाने वाली फीस पर रोक के लिए विभाग झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण में अपील पर विचार कर रहा है. इसके अलावा अभिभावकों को सलाह दी गयी है कि वह सीधे झारखंड शिक्षा न्यायाधिकार में शिकायत करें. अभिभावकों की शिकायत के आधार पर विभाग नियमानुसार लोगों के हक के साथ खड़ा रहेगा.
झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन विधेयक 2017 के पारित होने का इंतजार : राज्य में निजी स्कूलों में मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगाने के लिए कैबिनेट की ओर से झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन विधेयक 2017 को मंजूरी दी गयी. इसमें निजी स्कूलों की ओर से मनमानी फीस बढ़ोतरी पर नियंत्रण लगाने का प्रावधान है. इसके तहत निजी स्कूलों में फीस निर्धारण समिति बनेगी.
यह समिति ही फीस बढ़ाने संबंधी निर्णय लेगी. समिति को मौजूदा फीस में सिर्फ 10 फीसदी तक ही वृद्धि का अधिकार होगा. इससे अधिक की वृद्धि पर उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित जिला समिति अंतिम फैसला करेगी. अगर स्कूल जिला समिति की ओर से निर्धारित फीस से अधिक लेते हैं, तो उन पर कार्रवाई होगी. निर्धारित फीस से अधिक लेने पर पहली बार स्कूल पर 2.5 लाख तक का अर्थ दंड लगेगा. दूसरी बार ऐसा करने पर अर्थ दंड के अलावा स्कूल की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जायेगी. जिला स्तरीय समिति के फैसले से असंतुष्ट होने पर स्कूल प्रबंधन राज्य शिक्षा न्यायाधिकरण में अपील कर सकेगा.
हर बार बढ़ता स्कूलों का डेवलपमेंट चार्ज, नहीं बढ़ती सीटें : निजी स्कूलों की आेर से हर बार दाखिले में डेवलपमेंट फंड के नाम पर अभिभावकों से मोटी राशि वसूली जाती है, लेकिन विकास मद में प्राप्त की जाने वाली राशि से अधिकांश स्कूलों के संसाधनों में कोई बढ़ोतरी नहीं होती.
यही कारण है कि ज्यादातर स्कूलों में शिक्षा का यह कारोबार करोड़ों रुपये में पहुंच जाता है. स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के वेतन में भी अपेक्षित वृद्धि नहीं की जाती. अगर कहीं कुछ किया जाता है, तो बस अलग-अलग मदों में फीस में वृद्धि. शिक्षा विभाग के पास उपलब्ध आंकड़े पर यकीन करें तो कई स्कूलों में पिछले कई वर्षों से अपने प्री प्राइमरी कक्षाओं में सीट नहीं बढ़ाई गयी है. यही कारण है कि कमजोर एवं अभिवंचित वर्ग के लिए निर्धारित 25 फीसद सीटों के कुल आंकड़े 2100 में वृद्धि नहीं होती. शिक्षा विभाग निजी स्कूलों के प्री प्राइमरी कक्षाओं में मौजूद सीट की भी जांच करेगा.

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