हजारों की संख्या में लोग हुए कार्यक्रम में शामिल

जमशेदपुर : काेल्हान स्तरीय आलमी तब्लीगी इज्तिमा कपाली में जुमा की नमाज के बाद शुरू हाे गया. इसमें समाज के हजाराें की संख्या में लोग शामिल हुए. जिन्हें समाज के प्रमुख वक्ताआें ने दीनी व बुनियादी तालीम प्रदान की. लाेगाें ने देश में अमन-चैन की दुआ की. इज्तिमा एक अप्रैल काे समाप्त हाेगा. दिल्ली मरकज […]

जमशेदपुर : काेल्हान स्तरीय आलमी तब्लीगी इज्तिमा कपाली में जुमा की नमाज के बाद शुरू हाे गया. इसमें समाज के हजाराें की संख्या में लोग शामिल हुए. जिन्हें समाज के प्रमुख वक्ताआें ने दीनी व बुनियादी तालीम प्रदान की. लाेगाें ने देश में अमन-चैन की दुआ की. इज्तिमा एक अप्रैल काे समाप्त हाेगा. दिल्ली मरकज के माैलाना अरशदुल्लाह कासमी ने कहा कि जाे अच्छा इनसान नहीं बन सकता, वह सच्चा मुसलमान नहीं बन सकता. दुनिया काे जीतने वाला बादशाह सिकंदर भी दुनिया से खाली हाथ गया.

इसलिए कर्म कराे, जिसे लाेग याद रखे. उन्हाेंने कहा कि हर इनसान काे मरने के बाद की जिंदगी पर ध्यान देने की जरूरत है. किस तरह वह जिंदगी सही हाे जाये, जिसे हमें अल्लाह के साथ लंबे समय तक गुजारनी है. हर किसी काे इस बात का एहसास हाेना चाहिए कि हम दुनिया में क्याें आये हैं. हमें काैन से कर्म करना हैं अाैर काैन से नहीं. हर किसी काे एक दिन माैत का सामना करना है. इसके बाद कब्र में जायेंगे. कब्र से आखरत के लिए उठाये जायेंगे. अल्लाह के सामने ले जाये जायेंगे.
उस वक्त तय हाेगा कि जन्नत नसीब हाेगी या फिर जहन्नम. उस वक्त यह अफसाेस नहीं हाे कि काश अच्छे कर्म लिये हाेते ताे जन्नत नसीब हाेती. अल्लाह के सामने शर्मिंदा नहीं हाेना पड़ता. इसलिए समय रहते सभी काे ऐसा कर्म करने चाहिए कि उन्हें मरने के बाद की जिंदगी चैन से गुजारने का माैका मिल सके.
इज्तिमा के पहले दिन कलमा, ईमान, नमाज, अख्लाक, इल्म-जिक्र व दीन पर चर्चा हुई. हाजी इस्लाम ने बताया कि अपना सुलूक हर के किसी के साथ बेहतर हाे, किसी काे हमसे परेशानी या शिकायत का माैका नहीं मिले. दुनियावी तालीम के साथ ही दीनी तालीम पर ध्यान देना चाहिए. आज जाे भी बिगड़ाव पैदा हाे रहे हैं, उसका सबसे बड़ा कारण कि हम दीन की तालीम से पिछड़ रहे हैं. इज्तिमा खुद के अंदर की बुराइयाें काे मिटाने का माैका प्रदान करता है. वक्ताओं ने कहा कि इज्तिमा में बतायी गयी बाताें पर यदि अमल किया जाये ताे हम दुनिया में भी कामयाब हाेंगे अाैर आखरत में भी. दीनी शिक्षा आैर बुराइयाें से बचने की सीख मिलती है.
कपाली इज्तिमा स्थल के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये है. सरायकेला के एसडीआे, डीएसपी अाैर कपाली थाना प्रभारी लगातार व्यवस्था का जायजा ले रहे थे.
इन्हाेंने किया संबाेधित. मरकज निजामुद्दीन से माैलाना शफीकुर, माैलाना शमीम, मुफ्ती साजिद, माैलाना अहमद अली, अब्दुल मजीद, माैलाना शकूर, माैलाना शादाब, माैलना कमर नसीम, माैलाना डॉ रिजवान, माैलाना फरहान, माैलाना शमशेर.
आज सामूहिक निकाह, कल सामूहिक दुआ. इज्तिमा के दाैरान शनिवार काे असर अाैर मगरिब के बीच 15 लाेगाें के सामूहिक निकाह कराये जायेंगे. इसके लिए सभी ने निबंधन करा लिया है. आयाेजन समिति के सदस्याें ने बताया कि अन्य लोग भी सामूहिक निकाह के लिए भी लगातार संपर्क में हैं. रविवार को दाेपहर की नमाज के बाद इज्तिमा का समापन हाेगा. इस दाैरान सामूहिक दुआ में हजाराें लोग शामिल हाेंगे.
200 से अधिक सेवादार तैनात, भोजन के कई स्टॉल
इज्तिमा में बाहर से आने वालाें काे किसी की तरह की परेशानियां नहीं हाे, इसकाे लेकर 200 से अधिक सेवादार तैनात थे. वह हर किसी काे पार्किंग से लेकर ठहरने-बाथरूम, वजू खाना, शाैचालय अाैर लंगर हॉल आदि की आेर ले जाने का रास्ता दिखा रहे थे. इंतजामिया कमेटी ने 10-10 कट्ठा के तीन स्थानाें पर खाने की व्यापक व्यवस्था की है. इस दाैरान करीब 200 से अधिक रसाेईया काम में लगे हैं. खाने में वेज आैर नॉन वेज दाेनाें का ही इंतजाम किया गया है.
इज्तिमागाह पॉलीथिन मुक्त जोन, पार्किंग के बेहतर इंतजाम
पूरे इज्तिमागाह काे पॉलीथिन मुक्त जाेन घाेषित किया गया है. स्टॉल व अन्य कार्य के लिए पॉलीथिन का इस्तेमाल वर्जित है. हाजी इस्लाम ने बताया कि आयाेजन स्थल के आस-पास सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू, गुटका पाउच आदि पर प्रतिबंध रहेगा. सफाई में ग्रीन-क्लीन इज्तिमा के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं. वाहनों की बेहतर पार्किंग के लिए सेवादार दिन-रात माैजूद रहते हैं. दाे पहिया, कार आैर भारी वाहनाें की अलग-अलग पार्किंग की जा रही है.
इज्तिमा की बुनियाद है यह छह बातें
ईमान
अल्लाह एक है. इसके सिवाय काेई दूसरा माबूद नहीं. हजरत साहब अल्लाह के रसूल है. इसका यकीन ही ईमान है. ईश्वर पर विश्वास ही ईमान है. सबसे पहली मेहनत इसी काे लेकर हाेती है. उलेमाआें के मुताबिक यह यकीन यदि बन गया ताे खुद ही बुराइयाें से बचने लगेंगे आैर भलाई के कामाें की तरफ बढ़ेंगे.
नमाज
अपने कार्याें काे करते हुए खुदा काे याद करना. उलेमाअाें के मुताबिक नमाज हर एक मुसलमान पर फर्ज है. इसलिए तय समय पर नमाज अदा करनी चाहिए. उलेमा बताते हैं कि जब अजान हाेने लगे ताे दुनिया के सभी काम छाेड़कर नमाज अदा की जानी चाहिए, ताकि अल्लाह की इबादत
हाे सके.
इल्म आैर जिक्र
अच्छाई आैर बुराई में फर्क कर सके. इतना इल्म हर एक काे जरूरी है. महिलाआें आैर पुरुषाें के लिए इसकी काेई सीमा नहीं है. जितना हाे सके, ज्ञान हासिल करना चाहिए. हमेशा अल्लाह काे याद कराे, ऐसा करने से दिलाें से बुरे ख्याल निकलेंगे.
इखलास ए नियम
आप काेई भी काम कराे, इसमें दिखावे या मैं की भावना नहीं हाेनी चाहिए. काेई भी काम हाे इसका मकसद यही हाे कि अल्लाह मुझसे खुश हाे जाये. फिर वाे काम दीनी हाे या दुनियावी. उलेमाअाें के मुताबिक मदद के दाैरान यदि दिखावा या मैं की भावना आ गयी ताे यह सब फिजूल है.
इकराम ए मुस्लिम
बड़ाें का अदब, छाेटाे से प्यार. अपनाें से बड़ाें के साथ अदब आैर लिहाज से पेश आये. उनका ऐहतराम करें, वे भी अपने से छाेटाे से प्यार से पेश आएं. उन्हें भलाई की सीख दें अाैर बुराई की आेर जाने से राेके. यदि किसी का पड़ाेसी दुखी है ताे उसकी इबादत कबूल नहीं हाेगी. व्यवहार किसी काे दुख पहुंचाने वाला नहीं हाे.
तब्लीग का वक्त
राेजमर्रा की जरूरतें पूरी करने सभी दिन-रात काम में जुटे रहते हैं. इसके बीच कुछ समय ऐसा हाे, जिसमें कुछ नया सीख सकें या जिन्हें आता उन्हें सिखा सकें. समय के सात इनसानाें में कुछ बुराइयां आ जाती है. कुछ समय कुरआन, नमाज आैर जिक्र के बारे में सीखना चाहिए.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >