II निसार अहमद II
जमशेदपुर : रौनक अली व अहमद अंसारी कोल्हान क्षेत्र में महिला फुटबॉल की पहचान हैं. दोनों पिछले 20 साल से महिला फुटबॉलरों को प्रशिक्षित करके उनको सशक्त बनाने में जुटे हैं. लेकिन फेडरेशन की राजनीति की वजह से दोनों अपनी मुहिम को सही अंजाम तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं. फिर भी दोनों के प्रयास से अब तक 30 से अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय चैंपियनशिप में और 50 से अधिक जूनियर खिलाड़ी नेशनल व स्कूल नेशनल चैंपियनशिप में खेल चुके हैं.
की है नेशनल चैंपियनशिप में शिरकत
रौनक अली व अहमद अंसारी द्वारा प्रशिक्षित महिला फुटबॉल खिलाड़ी नेशनल स्तर तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं. इसमें सुनीत मुर्मू, गंगा कुमारी, उपल हेम्ब्रम, पूजा मुर्मू, सीता कुंकल, शकुंतला मार्डी, कविता जेना, मिनी सोरेन, शुखमत्ति पूर्ति, सिंघो सोरेन, सिंघो मार्डी, पूजा कुंकल ऐसी खिलाड़ी हैं, जो वर्तमान में राष्ट्रीय कैंप व सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में शिरकत कर रही हैं.
रौनक अली व अहमद अंसारी द्वारा प्रशिक्षित तीन लड़कियों को हाल ही में झारखंड पुलिस में नौकरी मिली है. इसमें चाईबासा की संगीता कुमारी, बारीडीह की संगीता मिंज व चाईबासा की संगीता मिंज शामिल हैं. वहीं पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी तुंपा कुमारी काशीडीह हाइस्कूल में एक खेल शिक्षक के रूप में अपना योगदान दे रही हैं.
1998 से शुरू हुआ सिलसिला
जमशेदपुर शुरू से ही पूरे झारखंड में स्पोर्ट्स सिटी के रूप में जाना जाता है. यहां फुटबॉल की सबसे पुरानी एकेडमी टीएफए है. यहां पर भारत के सबसे पुराने फुटबॉल लीग में शुमार जेएसए फुटबॉल लीग है.
लेकिन यहां पर महिलाओं के प्रशिक्षण या उनके लिए कोई बड़ा टूर्नामेंट नहीं होता है. 90 के दशक में ताता राव महिलाओं को प्रशिक्षित करते थे. लेकिन उनके टाटा स्टील से सेवानिवृत्त होने के बाद यह जिम्मेदारी अहमद अंसारी व रौनक अली ने संभाली, जो पिछले 20 सालों से महिला फुटबॉलरों को ट्रेनिंग दे रहे हैं.
पूरे कोल्हान से खिलाड़ी पहुंचते हैं आर्मरी मैदान
महिलाओं का फुटबॉल प्रशिक्षण पूरे कोल्हान क्षेत्र में एकमात्र जमशेदपुर के आर्मरी ग्राउंड में होता है. यहां पर अहमद अंसारी व रौनक अली ट्रेनिंग देते हैं. इसलिए यहां पर प्रशिक्षण लेने के लिए खिलाड़ी चाईबासा, झींकपानी, घाटशिला, मनोहरपुर, चक्रधरपुर, सरायेकला, धालभूमगढ़ और चाकुलिया से आते हैं. दूर से आनेवाली महिला खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षण की विशेष व्यवस्था रविवार व शनिवार को भी की जाती है.
अपनी जगह नहीं होने से होती है दिक्कत
रौनक अली ने बताया कि एआइएफएफ व महिला फुटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया भारत में फुटब़ॉल को संचालित करती है. महिला फुटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया से हम लोग मान्यता प्राप्त हैं. लेकिन आइएफएफ व महिला फुटबॉल फेडरेशन के बीच आपसी मतभेद होने के कारण सबसे अधिक नुकसान खिलाड़ियों को होता है. हम लोगों को ट्रेनिंग के लिए सही जगह भी नहीं मिल पाता.
महिलाओं को ट्रेनिंग देने के लिए आर्मरी मैदान का सहारा है. जहां पर बड़ी मिन्नत के बाद थोड़ी सी जगह टाटा स्टील ने ट्रेनिंग के लिए दी है.
उन्होंने बताया कि यह टीएफए का आधिकारिक अभ्यास ग्राउंड है. महिला व बालिकाओं को खेल से जोड़ने के लिए दो शिक्षिकाएं रजनी टोपनो और चिंता कुमारी दोनों कोच रौनक अली व अहमद अंसारी का पूरा साथ देती हैं. राजनगर में सरकारी शिक्षिका के रूप में कार्य कर रही चिंता व रजनी अपने स्कूल की टैलेंटेड बालिकाओं को उनके पास प्रशिक्षण के लिए भेजती हैं.
सरकार दे कुछ सुविधा
सचिव अहमद अंसारी के अनुसार हम लोग कई नेशनल टूर्नामेंट में भाग लेते हैं. महिलाएं अच्छा प्रदर्शन कर पदक व ट्रॉफी भी जीतती हैं. लेकिन इन लोगों को आर्थिक स्थिति या नौकरी में भागीदारी नहीं मिलने के कारण अंत में हार कर फुटबॉल छोड़ देती हैं.
इसलिए हमारी सरकार से गुजारिश है कि इन लोगों को भी सरकार पहचाने व कुछ सहायता दे. उन्होंने बताया कि हम फुटबॉल से महिला खिलाड़ियों को जोड़ने के लिए सिंहभूम क्षेत्र के प्राइवेट व सरकारी स्कूल में जाकर कैंप करते हैं और उनको फुटबॉल की जानकारी देते हैं.
