गांव में बदलाव की बयार, नावा जुवान जूमिद अखड़ा ने पहली बार में ही 117 यूनिट रक्त संग्रह किया

एक समय था जब लोग रक्तदान से कतराते थे, उन्हें यह डर रहता था कि रक्तदान से कमजोरी आएगी या स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा. लेकिन अब यह मिथक टूट चुका है. लोग समझ चुके हैं कि रक्तदान से न केवल किसी जरूरतमंद की जान बचाई जा सकती है, बल्कि इससे रक्तदाता के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

जमशेदपुर: सुंदरनगर क्षेत्र की सामाजिक संस्था नावा जुवान आखड़ा को वीवीडीए की ओर से 100 यूनिट से अधिक रक्त संग्रह करने के लिए पुरस्कृत किया गया. वीवीडीए की ओर से राजेश मार्डी ने गोड़ाडीह जाकर उनके कमेटी के पदाधिकारी व सदस्यों को माेमेंटो प्रदान किया. गोड़ाडीह में पिछले साल जुलाई महीने से नावा जुवान जुमिद अखड़ा द्वारा पहली बार रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया था. जिसमें 117 यूनिट रक्त संग्रह किया गया था. वीवीडीए झारखंड के आजीवन सदस्य राजेश मार्डी ने बताया कि सुदूर गांव देहात में 100 यूनिट रक्त संग्रह करना किसी चुनौती से कम नहीं है. लेकिन कमेटी की सक्रियता ने चुनौती को स्वीकार करते हुए क्षेत्र में रक्तदान को लेकर प्रचार-प्रसार किया और शिविर को सफल बनाया. इस अवसर पर राजाराम भूमिज, उदय मार्डी, हरमोहन प्रमाणिक, दुर्गा मार्डी, सुनाराम सरदार, संजय मार्डी, भुजाय मार्डी, सुजीत कुमार, ठाकुर मार्डी, जयराम मार्डी आदि उपस्थित थे. जमशेदपुर ब्लड सेंटर के जीएम संजय चौधरी सहित वीवीडीए के सभी सदस्यों ने गोड़ाडीह के रक्तवीरों को इस उपलब्धि पर बधाई दी है.

रक्तदान को लेकर बढ़ी है जागरूकता
वीवीडीए झारखंड के आजीवन सदस्य राजेश मार्डी ने सुदूर गांव देहातों में रक्तदान को लेकर जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इस बढ़ती जागरूकता का परिणाम है कि गांव के युवा, बुजुर्ग और महिलाएं भी अब रक्तदान के लिए आगे आ रहे हैं. एक समय था जब लोग रक्तदान से कतराते थे, क्योंकि उनके मन में यह भ्रांति थी कि रक्तदान करने से कमजोरी आती है. लेकिन अब समय बदल चुका है और गांव की तस्वीर भी बदल चुका है. स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों के निरंतर प्रयासों से गांवों में रक्तदान के महत्व को समझाने में सफलता मिली है. जागरूकता अभियानों, शिविरों और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीणों को रक्तदान के फायदे और इसके सुरक्षित प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जा रही है. इसका नतीजा यह है कि लोग न केवल रक्तदान के लिए प्रेरित हो रहे हैं, बल्कि इसे एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में भी अपना रहे हैं. उन्होंने कहा कि गांव के बुजुर्ग अपने अनुभवों के आधार पर युवाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं, जबकि महिलाएं भी अपनी सक्रिय भागीदारी से इस अभियान को मजबूती प्रदान कर रही हैं. रक्तदान के प्रति यह सकारात्मक बदलाव न केवल स्वास्थ्य के क्षेत्र में, बल्कि सामाजिक संरचना में भी एक महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है.

शहर से भी आगे निकल गया है गांव: जीएम
जमशेदपुर ब्लड सेंटर के जीएम संजय चौधरी ने बताया कि रक्तदान के मामले में गांव अब शहरों से भी आगे निकल गए हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग रक्तदान की महत्ता को अच्छी तरह समझने लगे हैं और इसे एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपना रहे हैं. इस बदलाव के पीछे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. जिन्होंने जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य शिविर और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीणों को रक्तदान के फायदे और इसकी सुरक्षित प्रक्रिया के बारे में शिक्षित किया है. उन्होंने बताया कि गांवों में अब युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्ग के लोग रक्तदान के लिए उत्साहित हो रहे हैं. एक समय था जब लोग रक्तदान से कतराते थे, उन्हें यह डर रहता था कि रक्तदान से कमजोरी आएगी या स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा. लेकिन अब यह मिथक टूट चुका है. लोग समझ चुके हैं कि रक्तदान से न केवल किसी जरूरतमंद की जान बचाई जा सकती है, बल्कि इससे रक्तदाता के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. गांव के बुजुर्ग अपने अनुभवों के आधार पर युवाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं, जबकि महिलाएं भी अपनी सक्रिय भागीदारी से इस अभियान को मजबूती प्रदान कर रही हैं.



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Author: Dashmat Soren

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