कल्याण नगर व इंदिरा नगर के बस्तीवासियों ने अंचल कार्यालय के सामने किया विरोध प्रदर्शन

जमशेदपुर अंचल कार्यालय में शनिवार को भुइयांडीह स्थित कल्याण नगर व इंदिरा नगर के बस्तीवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया. घर को तोड़े जाने विरोध में बस्तीवासियों ने आक्रोश प्रकट करते हुए अंचल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. विरोध प्रदर्शन करने के बाद बस्तीवासियों ने अंचलाधिकारी मनोज कुमार से मुलाकात की और अपना दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा.

जमशेदपुर: जमशेदपुर अंचल कार्यालय में शनिवार को भुइयांडीह स्थित कल्याण नगर व इंदिरा नगर के बस्तीवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया. घर को तोड़े जाने विरोध में बस्तीवासियों ने आक्रोश प्रकट करते हुए अंचल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. विरोध प्रदर्शन करने के बाद बस्तीवासियों ने अंचलाधिकारी मनोज कुमार से मुलाकात की और अपना दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा.एनजीटी के आदेशानुसार नदी के किनारे 15 मीटर के परिधि पर घर बनाकर रह रहे 145 लोगोंं को अंचल कार्यालय ने विगत छह जुलाई को जेपीएलइ की नोटिस जारी किया था. बस्तीवासियों को 14 दिनों की मोहलत देकर 20 जुलाई तक अपना जवाब देने को कहा गया था. शनिवार को बस्तीवासियों की ओर से अंचल कार्यालय द्वारा दिये गये नोटिस का जवाब देना था. लेकिन वे अंचल कार्यालय के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत नहीं कर पाये थे. हालांकि शनिवार को भुइयांडीह के कल्याणनगर व इंदिरा नगर के बस्तीवासी काफी संख्या में दलबल के साथ अंचल कार्यालय में पहुंचे जरूर थे.

क्या कहते हैं अंचलाधिकारी

जमशेदपुर अंचलाधिकारी मनोज कुमार ने कहा कि तीन-चार माह पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशानुसार जल संसाधन विभाग, मानगो नगर निगम, जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति और जिला प्रशासन का एक संयुक्त सर्वेक्षण हुआ था. जिसके बाद नदी किनारे 15 मीटर की परिधि पर रह रहे 145 लोगों को जेपीएलइ की नोटिस दी गयी थी. 20 जुलाई तक नोटिस का जवाब देना था. अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है. शनिवार को बस्तीवासी आये थे और दस्तावेज को प्रस्तुत करने के लिए समय देने की मांग कर रहे थे. बस्तीवासियों की मांग से वरीय पदाधिकारियों को अवगत करायेंगे. उसके बाद ही आगे की कोई कार्रवाई होगी.

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By Dashmat soren

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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