Jairam Mahto Barwadda Police Controversy: डुमरी विधायक व झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) प्रमुख जयराम महतो और बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार के बीच विवाद पिछले कुछ दिनों में लगातार गहराता गया है. मामला बड़ापिछरी पंचायत में कथित फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने के आरोप से शुरू हुआ और अब विधायक व पुलिस के बीच आमने-सामने की स्थिति तक पहुंच गया है. पूरे घटनाक्रम में प्राथमिकी, थाना परिसर में हंगामा, कथित मारपीट, वायरल ऑडियो और पुलिस संगठनों के विरोध ने विवाद को और गंभीर बना दिया है.
फर्जी प्रमाणपत्र के आरोप से शुरुआत
विवाद की शुरुआत बड़ापिछरी पंचायत की मुखिया यशोदा देवी की शिकायत से हुई. आरोप था कि उनके फर्जी पैड, मुहर और हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर जाति, आवास और वंशावली से संबंधित प्रमाणपत्र तैयार किये गये. इस मामले में पुलिस ने जेएलकेएम नेता गणेश दास को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की. इसी मामले को लेकर विधायक जयराम महतो अपने समर्थकों के साथ बरवाअड्डा थाना पहुंचे.
थाने में बढ़ा तनाव, दोनों पक्ष आमने-सामने
विधायक के थाना पहुंचने के बाद पुलिस और उनके समर्थकों के बीच कहासुनी और हाथापाई की स्थिति बनने की बात सामने आयी. पुलिस का आरोप है कि समर्थकों की भीड़ ने थाना परिसर में हंगामा किया और सरकारी काम में बाधा डाली. इसके बाद विधायक समेत 10 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी. वहीं, विधायक पक्ष की ओर से भी शिकायत दी गयी. विधायक पक्ष ने आरोप लगाया कि थाने में उनके साथ मारपीट और गला दबाने का प्रयास किया गया. साथ ही उनके समर्थक सुशील मंडल के साथ मारपीट तथा सोने की चेन और नकदी छीनने का भी आरोप लगाया गया. दूसरी ओर मुखिया के बेटे प्रदीप कुमार रजक ने विधायक पर जातिसूचक टिप्पणी और गला दबाने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दी. इन आरोपों की पुलिस जांच कर रही है.
21/22 अगस्त की फोन बातचीत बनी नया विवाद
इसके बाद बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार और जयराम महतो के बीच हुई कथित व्हाट्सऐप कॉल का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. थाना प्रभारी की शिकायत के अनुसार 22 अगस्त की रात करीब 8.09 बजे विधायक का फोन आया था. आरोप है कि बातचीत के दौरान विधायक ने समर्थक के खिलाफ प्राथमिकी और गिरफ्तारी को लेकर नाराजगी जतायी तथा थाना प्रभारी से अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया. थाना प्रभारी की शिकायत में विधायक पर वर्दी उतरवाने और सरकार बदलने के बाद देख लेने जैसी धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है. इस कथित बातचीत के आधार पर मामला और गंभीर हो गया तथा थाना प्रभारी की ओर से विधायक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी.
वायरल ऑडियो पर विधायक की सफाई
जयराम महतो ने वायरल ऑडियो में अपनी आवाज और बातचीत के अंशों से छेड़छाड़ किये जाने का आरोप लगाया है. विधायक का कहना है कि पूरी बातचीत करीब 11 मिनट की थी, जबकि सोशल मीडिया पर उसका चुनिंदा हिस्सा वायरल किया गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि ऑडियो में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिये भी बदलाव किये गये हैं. हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई तकनीकी प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया है. विधायक ने पूरे मामले को अपने खिलाफ साजिश बताया और कहा कि वह अपने समर्थक के साथ पुलिस द्वारा किये गये कथित व्यवहार की जानकारी लेने थाना पहुंचे थे. उन्होंने थाना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों और मौके पर मौजूद पत्रकारों के वीडियो फुटेज की जांच कराने की मांग की है.
पुलिस संगठनों ने खोला मोर्चा
वायरल ऑडियो के बाद मामला केवल विधायक और थाना प्रभारी तक सीमित नहीं रहा. झारखंड पुलिस एसोसिएशन और पुलिस मेंस एसोसिएशन ने भी इसे गंभीरता से लिया. पुलिस संगठनों ने विधायक से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की और 24 घंटे के भीतर माफी नहीं मांगने पर आंदोलन की चेतावनी दी.
अब जांच पर टिकी नजर
फिलहाल इस पूरे मामले में विधायक जयराम महतो और उनके समर्थकों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी, मुखिया पक्ष की शिकायत और थाना प्रभारी की शिकायत, तीनों पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण हो गयी है. वायरल ऑडियो की सत्यता, उसमें किसी तरह की एडिटिंग हुई है या नहीं और थाना परिसर में वास्तव में क्या हुआ, इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे. विवाद अब राजनीतिक और पुलिस संगठनों के स्तर तक पहुंच चुका है, इसलिए अब आने वाले दिनों में पुलिस की कार्रवाई और विधायक की अगली प्रतिक्रिया पर सभी की नजर है.
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