रांचीः RIMS में सितंबर से मरीजों को बेड पर मिलने लगेगी ब्लड जांच रिपोर्ट

रिम्स प्रबंधन अस्पताल में भर्ती मरीजों को अब बेड पर ही जांच रिपोर्ट मिलेगी. हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉरमेशन सिस्टम (एचआईएमएस) का ट्रायल अंतिम चरण में है और यह सेवा 10 सितंबर तक शुरू होने की उम्मीद है. इससे मरीजों को बार-बार लैब या विभाग के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.

RIMS Blood Test Report: रिम्स प्रबंधन अस्पताल में भर्ती मरीजों को बेड पर ही जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने की तैयारी में जुटा है. इसके लिए हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉरमेशन सिस्टम (एचआईएमएस) का ट्रायल अंतिम चरण में है. इसके तहत लेबोरेट्री इंफॉरमेशन सिस्टम (एलआईएस) को एचआईएमएस से जोड़ा जाएगा. सी-डैक के सॉफ्टवेयर के माध्यम से तैयार की जा रही इस ऑनलाइन व्यवस्था के 10 सितंबर तक शुरू होने की उम्मीद है. सेवा शुरू होने के बाद मरीजों की जांच रिपोर्ट डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगी और मोबाइल पर भी उपलब्ध हो सकेगी.

मरीजों और परिजनों को बार-बार लैब या संबंधित विभाग में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. फिलहाल विभिन्न विभागों में सिस्टम की जांच और कमियों को दूर करने का काम चल रहा है. सी-डैक के इंजीनियर और रिम्स के लैब इंचार्ज ने तैयारियों का जायजा लिया.

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एचआईएमएस सेवा के लिए लैब में अंतिम चरण का चल रहा ट्रायल

रिम्स में दो लैब हैं, जहां प्रतिदिन होती है 8000 मरीजों के खून की जांच

रिम्स में दो लैब हैं, जहां ओपीडी और भर्ती मरीजों के खून की जांच होती है. पहला ट्रॉमा सेंटर लैब और दूसरा सेंट्रल लैब है. ट्रॉमा सेंटर लैब में प्रतिदिन 3,500 से 4,000 सैंपल की जांच होती है. वहीं, सेंट्रल लैब में औसतन 4,000 सैंपल की जांच होती है. एचआईएमएस के लागू होने से दोनों लैब में 24 घंटे जांच की सुविधा मिलने लगेगी. हालांकि, ट्रॉमा लैब अभी भी 24 घंटे की सुविधा उपलब्ध करा रहा है.

सैंपल कलेक्शन को भी आसान करने की तैयारी

जांच रिपोर्ट के साथ सैंपल कलेक्शन को भी आसान करने की तैयारी चल रही है. ओपीडी और वार्ड में भर्ती मरीजों की जांच के लिए एक जगह ही सैंपल लिए जाएं, इसका भी काम चल रहा है. इससे मरीजों को अलग-अलग विभाग में जाकर जांच के लिए ब्लड का सैंपल नहीं देने होंगे.

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मरीजों को बेड पर रिपोर्ट मिले, इसके लिए क्यूआर कोड जारी किया जाएगा

रिम्स के चिकित्सा उपाधीक्षक डॉ साकेत वर्मा ने बताया कि एचआईएमएस सेवा को 10 सितंबर तक चालू करने की कोशिश है. इसके लिए में ट्रायल अंतिम चरण में है. हर विभाग इसके लिए नए तरीके से रिपोर्ट तैयार की जा रही है. जहां दिक्कत आ रही है, उसका निराकरण किया जा रहा है. क्यूआर कोड जारी किया जाएगा, जिससे मरीजों को बेड पर ही रिपोर्ट मिल जाए, रिपोर्ट लैब में सुरक्षित भी रहेगी, ताकि जरूरत पड़ने पर इसे दोबारा जारी किया जा सकेगा.


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लेखक के बारे में

By अर्चना कुजूर

अर्चना कुजूर एक डिजिटल पत्रकार और कंटेंट राइटर हैं, जो वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कार्यरत हैं. वह झारखंड डेस्क के रांची एडिशन के अंतर्गत आने वाले विभिन्न जिलों के साथ-साथ राज्य की प्रमुख राजनीतिक, सामाजिक, प्रशासनिक और जनसरोकार से जुड़ी खबरों को कवर करती हैं. अर्चना ने वर्ष 2016 में क्राफ्ट फिल्म स्कूल, रोहिणी (नई दिल्ली) से टीवी जर्नलिज्म एंड न्यूज रीडिंग में एक वर्षीय डिप्लोमा किया. इसके बाद उन्होंने नोएडा स्थित नेशनल वॉयस न्यूज और इंडिया वॉयस न्यूज चैनल (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) में इंटर्नशिप करने के साथ-साथ व्यावहारिक पत्रकारिता का अनुभव हासिल किया.

झारखंड लौटने के बाद उन्होंने कशिश न्यूज चैनल में लगभग डेढ़ वर्ष तक आउटपुट विभाग में कॉपी राइटर के रूप में कार्य किया. इसके बाद रांची एक्सप्रेस में एजुकेशन बीट पर रिपोर्टिंग की और प्रिंट पत्रकारिता का अनुभव हासिल किया. वर्ष 2022 से उन्होंने न्यूज11 भारत और नक्षत्र न्यूज चैनल में लगभग दो-दो वर्षों तक डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए राज्य की राजनीति, शिक्षा, रोजगार, प्रशासन, योजनाओं और समसामयिक विषयों पर हजारों समाचार और विशेष लेख लिखें.

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