RIMS Blood Test Report: रिम्स प्रबंधन अस्पताल में भर्ती मरीजों को बेड पर ही जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने की तैयारी में जुटा है. इसके लिए हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉरमेशन सिस्टम (एचआईएमएस) का ट्रायल अंतिम चरण में है. इसके तहत लेबोरेट्री इंफॉरमेशन सिस्टम (एलआईएस) को एचआईएमएस से जोड़ा जाएगा. सी-डैक के सॉफ्टवेयर के माध्यम से तैयार की जा रही इस ऑनलाइन व्यवस्था के 10 सितंबर तक शुरू होने की उम्मीद है. सेवा शुरू होने के बाद मरीजों की जांच रिपोर्ट डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगी और मोबाइल पर भी उपलब्ध हो सकेगी.
मरीजों और परिजनों को बार-बार लैब या संबंधित विभाग में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. फिलहाल विभिन्न विभागों में सिस्टम की जांच और कमियों को दूर करने का काम चल रहा है. सी-डैक के इंजीनियर और रिम्स के लैब इंचार्ज ने तैयारियों का जायजा लिया.
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एचआईएमएस सेवा के लिए लैब में अंतिम चरण का चल रहा ट्रायल
रिम्स में दो लैब हैं, जहां प्रतिदिन होती है 8000 मरीजों के खून की जांच
रिम्स में दो लैब हैं, जहां ओपीडी और भर्ती मरीजों के खून की जांच होती है. पहला ट्रॉमा सेंटर लैब और दूसरा सेंट्रल लैब है. ट्रॉमा सेंटर लैब में प्रतिदिन 3,500 से 4,000 सैंपल की जांच होती है. वहीं, सेंट्रल लैब में औसतन 4,000 सैंपल की जांच होती है. एचआईएमएस के लागू होने से दोनों लैब में 24 घंटे जांच की सुविधा मिलने लगेगी. हालांकि, ट्रॉमा लैब अभी भी 24 घंटे की सुविधा उपलब्ध करा रहा है.
सैंपल कलेक्शन को भी आसान करने की तैयारी
जांच रिपोर्ट के साथ सैंपल कलेक्शन को भी आसान करने की तैयारी चल रही है. ओपीडी और वार्ड में भर्ती मरीजों की जांच के लिए एक जगह ही सैंपल लिए जाएं, इसका भी काम चल रहा है. इससे मरीजों को अलग-अलग विभाग में जाकर जांच के लिए ब्लड का सैंपल नहीं देने होंगे.
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मरीजों को बेड पर रिपोर्ट मिले, इसके लिए क्यूआर कोड जारी किया जाएगा
रिम्स के चिकित्सा उपाधीक्षक डॉ साकेत वर्मा ने बताया कि एचआईएमएस सेवा को 10 सितंबर तक चालू करने की कोशिश है. इसके लिए में ट्रायल अंतिम चरण में है. हर विभाग इसके लिए नए तरीके से रिपोर्ट तैयार की जा रही है. जहां दिक्कत आ रही है, उसका निराकरण किया जा रहा है. क्यूआर कोड जारी किया जाएगा, जिससे मरीजों को बेड पर ही रिपोर्ट मिल जाए, रिपोर्ट लैब में सुरक्षित भी रहेगी, ताकि जरूरत पड़ने पर इसे दोबारा जारी किया जा सकेगा.
