हजारीबाग के तीन थाने आज भी भवन विहीन, नौ वर्षों से इंतजार

जिले में पुलिस विभाग आम जनता को सुरक्षा देने का दावा करता है, लेकिन खुद की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की स्थिति बेहद चिंताजनक है.

लोहसिंघना थाना प्लास्टिक के तिरपाल से ढंका, बारिश में होता रिसाव प्लास्टिक तिरपाल के सहारे चल रहा लोहसिंघना थाना बारिश में भींगते है दस्तावेज़, लोहसिंघना थाना बेहाल सिरिस्ता-मालखाना एक कमरे में, संसाधनों का घोर अभाव सांपों का खतरा और रिसाव से जूझ रहा लोहसिंघना थाना 22हैज102में- बरसात से बचने के लिए लोहसिंघना थाना को तिरपाल से ढंका गया हजारीबाग के तीन थानों की बदहाल स्थिति: सुरक्षा देने वाला विभाग खुद असुरक्षित हजारीबाग. जिले में पुलिस विभाग आम जनता को सुरक्षा देने का दावा करता है, लेकिन खुद की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की स्थिति बेहद चिंताजनक है. जिले के तीन थानों लोहसिंघना, कोर्रा और मुफ्फसिल का अपना भवन नहीं है. इन थानों का नोटिफिकेशन अप्रैल 2016 में हुआ था, लेकिन नौ वर्षों बाद भी भवन निर्माण नहीं हो पाया है. मुफ्फसिल थाना : 30 वर्षों तक किराये के भवन में संचालित होता रहा मुफ्फसिल थाना पहले 30 वर्षों तक किराये के भवन में संचालित होता रहा. वर्तमान में यह लाखे पंचायत भवन में चल रहा है, जो अब नगर निगम क्षेत्र में आता है. कोर्रा थाना डीवीसी के एक जर्जर भवन में संचालित हो रहा है, जहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. इन क्षेत्रों में कई एकड़ सरकारी गैर-मजरुआ जमीन उपलब्ध है, फिर भी जिला प्रशासन भवन निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण नहीं कर पाया है, हालांकि, मुफ्फसिल थाना के लिए एनएच-33 फोरलेन बायपास पर तीन एकड़ जमीन अधिग्रहित की गयी है. वरीय पुलिस अधिकारियों के अनुसार भवन निर्माण के लिए फंड उपलब्ध है, लेकिन जमीन अधिग्रहण में देरी के कारण कार्य लंबित है. लोहसिंघना थाना : नौ वर्षों से लोहे के एजबेस्टस शेड में संचालित हो रहा है लोहसिंघना थाना की स्थिति सबसे दयनीय है. यह थाना पिछले नौ वर्षों से लोहे के एजबेस्टस शेड में संचालित हो रहा है. शेड जंग खा चुका है और जगह-जगह छेद हो गये हैं, जिससे बारिश के मौसम में सिरिस्ता, मालखाना और थाना प्रभारी कार्यालय में पानी टपकता है. इससे बचाव के लिए छत पर प्लास्टिक का तिरपाल ढंक दिया गया है. पुलिसकर्मियों के अनुसार बरसात के दिनों में मालखाना और सिरिस्ता में कई बार सांप भी घुस आते हैं, जिससे जान का खतरा बना रहता है. थाना में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं. सिरिस्ता और मालखाना एक ही कमरे में संचालित हो रहे हैं, जहां बारिश का पानी रिसता है और फाइलें व जब्त सामान खराब हो जाते हैं. यह स्थिति न केवल पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है. प्रशासन को चाहिए कि वह जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कर भवन निर्माण शुरू करे. साथ ही, जब तक स्थायी भवन नहीं बनता, तब तक अस्थायी भवनों में सुरक्षा और संसाधनों की समुचित व्यवस्था की जाये.

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Author: VIKASH NATH

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