विश्वविद्यालय की पहचान शोध से होती है : कुलपति

विनोबा भावे विश्वविद्यालय में शोधार्थियों के साथ सीधी वार्ता कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को विवेकानंद सभागार में किया गया.

27हैज22में- कुलपति प्रो चंद्रभूषण शर्मा 27हैज23में- सीधी वार्ता में में उपस्थित शोधार्थी व अन्य हज़ारीबाग. विनोबा भावे विश्वविद्यालय में शोधार्थियों के साथ सीधी वार्ता कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को विवेकानंद सभागार में किया गया. कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा ने अलग-अलग विभागों के शोधार्थियों से सीधी बात की. कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में कुल 269 शोधार्थी पंजीकृत है जबकि यहां उतनी संख्या नहीं दिख रही है. कुलपति ने विश्वविद्यालय के शोध एवं पीएचडी थीसिस पर असंतोष व्यक्त किया. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की पहचान शोध से होती है. अतः शोध की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जायेगा. कुलपति ने विद्यार्थियों से कहा कि आप समय-समय पर आलेख लिखे एवं स्तरीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित करायें. ख्याति प्राप्त शोध पत्रिका में प्रकाशित आलेख को पुरस्कृत करने की बात उन्होंने कही. बताया कि अलग-अलग विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठियों में जाकर भाग लें. यदि किसी स्तरीय संगोष्ठी में किसी शोधार्थी का पत्र स्वीकृत होता है और उसे किसी प्रकार का स्कॉलरशिप नहीं मिलता है, तो उसे संगोष्ठी में भाग लेने से संबंधित खर्च में सहयोग पर विचार किया जायेगा. शोधार्थियों ने बताया कि 6 महीना का कोर्स वर्क पूरा करने में दो वर्ष लग जाते हैं. इस पर कुलपति ने आश्वासन दिया कि अब कोर्स वर्क 6 महीने से लेकर एक साल के भीतर पूर्ण कराया जायेगा. कोर्स वर्क के अंक पत्र में अब दो क्रेडिट का भी उल्लेख होगा. प्रो चंद्र भूषण शर्मा ने बताया कि उन्हें प्लेगियारिज्म परीक्षण से संबंधित शिकायतें मिली है. यह जवाबदेही एक मैडम को दी गयी है. अब एक दिन में प्लेगियारिज्म प्रतिवेदन प्राप्त होगा. अब शोध आलेख का भी प्लेगियारिज्म परीक्षण संभव होगा. बताया कि पीएचडी परिनियम से संबंधित बहुत से विषय है जो स्पष्ट नहीं है तथा लागू नहीं है. इससे भी शोधार्थियों को कठिनाई हो रही है. बहुत जल्द विद्वत परिषद की बैठक में इस समस्या का समाधान करेंगे. शोध संबंधी सभी कार्य शोध परिनियम के तहत ही संचालित किए जायेंगे. विद्यार्थियों ने बताया कि केंद्रीय पुस्तकालय में किताबों की खरीद की आवश्यकता है. इस पर कुलपति ने बताया कि उनको जानकारी हुई है कि पिछले दिनों मात्र 18 पुस्तक खरीदी गयी हैं. कुलपति ने महिला शोधार्थियों से विश्वविद्यालय के छात्रावास में रहने की बात कही. बताया कि छात्रावास 12 महीना खुला रहेगा. अवकाश के समय भी किसी को जबरदस्ती खाली नहीं कराया जाएगा. महिला सुरक्षा कर्मी भी वहां होंगी. कुलपति ने बताया कि सभी शोधार्थियों का मोबाइल नंबर उनके मोबाइल में सुरक्षित रहेगा. शोधार्थी अपनी समस्या को लेकर सीधे कुलपति से बात करेंगे. कुलपति एवं शोधार्थियों के बीच किसी बाहरी को आने नहीं दिया जाएगा. शिक्षा शास्त्र विभाग में जल्द शुरू होगा शोध शोधार्थियों के साथ सीधी संवाद कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने जानना चाहा कि शिक्षाशास्त्र विभाग से कौन-कौन शोधार्थी यहां उपस्थित है. ज्ञात हो कि कुलपति खुद शिक्षाशास्त्र विषय से हैं. तब कुलपति को बताया गया की शिक्षाशास्त्र विभाग में शोध नहीं होता हैं. कुलपति ने आश्वासन दिया कि बहुत जल्द ऐसे विषयों में भी शोध प्रारंभ की जायेगी. ज्ञात हो कि कई बार विद्वत परिषद की बैठक में इस बात को उठाये जाने के बावजूद इस पर कोई ठोस पहल अब तक नहीं हुई है. बहरहाल विनोबा भावे विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र के विद्यार्थी आसपास के निजी विश्वविद्यालय में पीएचडी शोध करने को विवश है. शोध के क्षेत्र में नैक मूल्यांकन में कम अंक प्राप्त करने का यह भी एक प्रमुख कारण था.

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Author: VIKASH NATH

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