हजारीबाग. हजारीबाग धर्मप्रांत में बुधवार को राख बुधवार (ऐश वेडनेसडे) के अवसर पर विशेष मिस्सा का आयोजन किया गया. शहर स्थित ट्रांसफिगरेशन कैथेड्रल चर्च में आयोजित इस अनुष्ठान में करीब एक हजार श्रद्धालु शामिल हुए. मिस्सा के मुख्य उत्सवकर्ता हजारीबाग धर्मप्रांत के बिशप मोस्ट रेव आनंद जोजो रहे. परंपरा के अनुसार पिछले वर्ष आशीषित खजूर की पत्तियों से तैयार राख से श्रद्धालुओं के माथे पर क्रॉस का चिह्न लगाया गया. कहा गया कि यह चिह्न मानव जीवन की नश्वरता और पापों से पश्चाताप का प्रतीक है. राख लगाते समय तू धूल है और धूल में मिल जायेगा वाक्य के साथ आत्मचिंतन का संदेश दिया गया. मौके पर रेव एंथनी केजे, फादर मनोज, फादर अनूप लकड़ा, फादर रेमंड, फादर टॉमी, फादर प्रदीप, फादर विनोद सहित अन्य पुजारी व विभिन्न कांग्रेगेशनों की साध्वियां उपस्थित रहीं.
सच्चा उपवास वही है, जो हमें ईश्वर के निकट लाये
अपने प्रवचन में बिशप आनंद जोजो ने कहा कि लेंट का 40 दिवसीय काल आत्मशुद्धि, उपवास, प्रार्थना और सेवा का समय है. उन्होंने कहा कि यह केवल भोजन त्याग का नहीं, बल्कि बुराइयों से दूर रहकर जरूरतमंदों की सहायता करने का अवसर है. सच्चा उपवास वही है, जो हमें ईश्वर के निकट लाये और समाज में प्रेम व करुणा का संदेश फैलाये. एफसीसी कांग्रेगेशन के नेतृत्व में कॉयर द्वारा प्रस्तुत भक्ति गीतों ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया.
