बिहार में स्वतंत्रता आंदोलन की सामाजिक पृष्ठभूमि पर संगोष्ठी

मार्खम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के इतिहास विभाग ने शुक्रवार को एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया.

4हैज103में- संगोष्ठी को संबिधित करते शिक्षक

4हैज104में- संगोष्ठी में उपस्थित शिक्षक व विद्यार्थी

हजारीबाग. मार्खम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के इतिहास विभाग ने शुक्रवार को एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया. संगोष्ठी का विषय था- बिहार में स्वतंत्रता आंदोलन की सामाजिक पृष्ठभूमि (1912–1922). कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. संध्या प्रेम ने की. डॉ. संध्या प्रेम ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन विद्यार्थियों को इतिहास की गहरायी से समझने का अवसर प्रदान करते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों की ऐतिहासिक समझ को समृद्ध करते हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक दायित्वों के प्रति भी जागरूक बनाते हैं. संगोष्ठी में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली के इतिहास विभाग के प्रोफेसर डॉ. जावेद आलम ने 1912 से 1922 के बीच बिहार में हुए स्वतंत्रता आंदोलन के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि यह दशक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक काल था, जब महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन की नींव रखी गयी. बिहार में नील विद्रोह, चंपारण सत्याग्रह और कृषक आंदोलनों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों ने स्वतंत्रता संघर्ष में सक्रिय भागीदारी की. संगोष्ठी में विनोबा भावे विश्वविद्यालय के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. हितेंद्र अनुपम ने भी विषय पर अपने विचार साझा किये. कार्यक्रम का संचालन इतिहास विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. अमृता एक्का ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. श्याम किशोर सिंह ने किया. इस अवसर पर डॉ. कौशल कुमार, कॉलेज के शिक्षकगण, शोधार्थी और इतिहास विभाग के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे.

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Author: VIKASH NATH

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