'मेहनत के सामने गरीबी मायने नहीं रखती', बिना कोचिंग NET-JRF पास कर हजारीबाग की मधुबाला ने रचा सफलता का इतिहास

चौपारण की मधुबाला कुमारी ने बिना किसी कोचिंग के स्वयं मेहनत कर यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा में सफलता हासिल की है। जानिए उनकी प्रेरणादायक सफलता की कहानी।

चौपारण: हजारीबाग के चौपारण प्रखंड के खिलाही गांव की मधुबाला कुमारी ने बिना किसी कोचिंग के अपनी मेहनत और लगन के दम पर UGC NET-JRF 2026 में सफलता हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है. मधुबाला ने यह सफलता अपने दूसरे प्रयास में हासिल की. उन्होंने घर पर रहकर स्वयं पढ़ाई की और तैयारी में YouTube की भी मदद ली.

मधुबाला ने बताया कि उन्होंने अपनी तैयारी पूरी तरह खुद की. अपने लक्ष्य पर भरोसा रखते हुए नियमित पढ़ाई और मेहनत को सफलता का आधार बनाया. उन्होंने कहा कि मेहनत के सामने गरीबी कोई मायने नहीं रखती. यदि लक्ष्य तय हो और उसे हासिल करने के लिए ईमानदारी से प्रयास किया जाये, तो सफलता जरूर मिलती है.

अर्थशास्त्र से की पढ़ाई

मधुबाला ने वर्ष 2015 में शहीद भगत सिंह उच्च विद्यालय, झापा से मैट्रिक की परीक्षा पास की. इसके बाद भद्रकाली महाविद्यालय से इंटर की पढ़ाई पूरी की. उन्होंने हजारीबाग के केबी वीमेंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक किया और विनोबा भावे विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की.

पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने आगे की शिक्षा और करियर को लेकर अपना लक्ष्य तय कर लिया था. इसके लिए वह लगातार मेहनत करती रहीं और दूसरे प्रयास में UGC NET-JRF परीक्षा में सफलता हासिल की.

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JRF की मदद से PhD कर बनना चाहती हैं प्रोफेसर

मधुबाला का लक्ष्य अब JRF के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता से PhD की पढ़ाई पूरी करना और प्रोफेसर बनना है. इसके साथ ही वह सरकारी नौकरी की तैयारी भी कर रही हैं.

उनकी सफलता की खबर मिलने के बाद परिवार और क्षेत्र के लोगों में खुशी का माहौल है. पिता राजेंद्र साव, जिला परिषद सदस्य राकेश रंजन, मुखिया अन्नपूर्णा देवी, समाजसेवी दशरथ साव, महादेव प्रजापति, बिनोद सिंह समेत कई लोगों ने मधुबाला को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.

ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली मधुबाला की यह उपलब्धि उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा है, जो आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कठिनाई महसूस करते हैं.

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By Mithun

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