Lockdown Effect: हजारीबाग में पोल्ट्री उद्योग का 100 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित, 10 हजार श्रमिक बेरोजगार

कोरोना वायरस के कहर में पोल्ट्री उद्योग को भी चौपट कर दिया है. बीते करीब डेढ माह से हजारीबाग के 70 फीसदी पोल्ट्री फॉर्म में ताला लटका हुआ है. छोटे और बड़े स्तर पर इस उद्योग को संचालित करनेवालों को दाना, दवाई, परिवहन और श्रमिक नहीं मिल रहे हैं. नतीजतन लाखों मुर्गियां बेमौत ही मर गयीं. कई फॉर्म वाले ने तो मुर्गियों को जिंदा जंगल में छोड़ दिया.

हजारीबाग : कोरोना वायरस के कहर में पोल्ट्री उद्योग को भी चौपट कर दिया है. बीते करीब डेढ माह से हजारीबाग के 70 फीसदी पोल्ट्री फॉर्म में ताला लटका हुआ है. छोटे और बड़े स्तर पर इस उद्योग को संचालित करनेवालों को दाना, दवाई, परिवहन और श्रमिक नहीं मिल रहे हैं. नतीजतन लाखों मुर्गियां बेमौत ही मर गयीं. कई फॉर्म वाले ने तो मुर्गियों को जिंदा जंगल में छोड़ दिया.

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उद्योग चलाने वालों का कहना है कि यदि लॉकडाउन खुलता भी है तो दोबारा पोल्ट्री उद्योग को खड़ा करने में एक साल से अधिक का समय लग जायेगा. पोल्ट्री उद्योग संचालकों का कहना है कि डेढ माह में अकेले हजारीबाग जिले में ही 100 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है.

पोल्ट्री उद्योग से जुड़े हजारों लोग बेरोजगार : जमालउद्दीन की रिपोर्ट के अनुसार हजारीबाग जिला झारखंड का सबसे बड़ा पोल्ट्री उद्योग क्षेत्र है. पोल्ट्री उद्योग से जुड़े लगभग 10 हजार लोग बेरोजगार हो गये हैं. उद्योग में काम करनेवाले श्रमिकों का काम बंद होने से वे अपने गांवों को लौट गये हैं. इसी प्रकार मुर्गियों, अंडों को दुकान तक ले जाने से लेकर चिकन सप्लायर और दाना निर्माता तक का काम बंद हो गया है. इस तरह से इस चेन से जुड़े हजारों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.

सरकार मदद करे : हजारीबाग डेमोटांड मोरांगी स्थित कोलकाता हैचरी के संचालक राजीव रंजन मिश्रा ने बताया कि कोरोना से पोल्ट्री उद्योग को करोड़ों रुपये का नुकसान हो गया है. सरकार को हमारे उद्योग को आगे बढ़ाने में मदद करनी चाहिए. बिजली विभाग पोल्ट्री उद्योग पर प्रेशर न बनाकर उसे सहयोग करे. पिछले 18 वर्षों से कोलकाता हैचरी ग्राहकों के बीच गुणवत्ता और विश्वास के लिए जाना जाता है. 18 वर्षों में ऐसा समय कभी नहीं आया था.

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Author: AmleshNandan Sinha

Published by: Prabhat Khabar

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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