बरकट्ठा. लीला गुरुकुल तुर्कबाद में प्रकृति और संस्कृति के अनूठे पर्व करमा का आयोजन पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ किया गया. विद्यालय परिसर में स्थापित पारंपरिक करम अखाड़ा में विधि-विधान और रीति-रिवाज के अनुसार करम डाली की स्थापना की गयी. इस दौरान छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर झारखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति और परंपराओं को जीवंत कर दिया.
मांदर की थाप और सुमधुर पारंपरिक गीतों के बीच बच्चों द्वारा प्रस्तुत सामूहिक करम नृत्य से विद्यालय परिसर उत्सवमय हो उठा. छात्र-छात्राओं ने एक से बढ़कर एक लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पेश कर लोगों का मन मोह लिया.
निदेशक जितेंद्र प्रसाद ने कहा कि करमा केवल एक पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति सम्मान, भाई-बहन के पवित्र प्रेम, सामुदायिक एकता और अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश देता है. उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को अपनी लोक-संस्कृति, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना भी आवश्यक है.
कार्यक्रम को सफल बनाने में कुमार सौरभ पांडेय, रामनारायण यादव, अजय चौधरी, प्रेम सागर, शशि बर्नवाल, कुमकुम बर्णवाल, विद्या चौधरी, प्रियंका कुमारी, राजू टिंकू पांडेय, दयानंद राय समेत अन्य लोगों का योगदान रहा
