आवास में नहीं रह रहे पदाधिकारी, हजारीबाग में शिक्षा अधिकारियों के सरकारी आवास सुनसान

हजारीबाग में शिक्षा विभाग के आलीशान सरकारी आवास लंबे समय से खाली और वीरान पड़े हैं. रखरखाव के अभाव में ये अब भूत बंगले जैसे दिख रहे हैं, जानें पूरी खबर.

हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट

झारखंड के हजारीबाग में सरकारी खजाने से बने शिक्षा अधिकारियों के आलीशान आवास आज वीरान पड़े हैं. रखरखाव के अभाव में ये आवास अब भूत बंगले का रूप ले चुके हैं. शहरी क्षेत्र के झील रोड पर एक ही लाइन में स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निर्देशक (आरजेडीइ), जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीइओ) और जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसइ) के सरकारी आवास पिछले काफी समय से खाली पड़े हैं. तीनों आवासों में ताले लटके हुए हैं.

झाड़ियों से पटे आवास, कोई पूछने वाला नहीं

आरजेडीई और डीएसई का आवास तो इतने लंबे समय से खाली है कि परिसर में चारों तरफ ऊंची-ऊंची झाड़ियां उग गई हैं. गेट पर धूल जमी है और दीवारों पर काई लग गई है. एकाएक देखने पर लगता है कि ये सरकारी आवास नहीं, बल्कि कोई सुनसान भूत बंगला है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इन आवासों की सुध लेने वाला कोई नहीं है. न बिजली का बिल जमा हो रहा है, न सफाई. करोड़ों की लागत से बने ये आवास बेकार पड़े हैं.

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डीइओ का आवास भी फिलहाल खाली

जिले में डीइओ का आवास भी फिलहाल खाली है. पदस्थापित पदाधिकारी अपने निजी आवास या किराए के मकान में रह रहे हैं. तीनों महत्वपूर्ण पदों के अधिकारी एक ही परिसर में रहने से आपसी समन्वय और फाइलों के त्वरित निपटारे में सुविधा होती, लेकिन यह व्यवस्था ही लंबे समय से ध्वस्त है.

सरकारी संपत्ति के दुरूपयोग पर उठ रहे सवाल

शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारियों के आवास इस तरह खाली रहने से सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और रखरखाव पर सवाल उठ रहे हैं. आम लोग मांग कर रहे हैं कि खाली पड़े आवासों को शिक्षक और छात्रों के लिए हॉस्टल या ट्रेनिंग सेंटर के रूप में उपयोग पर जिला प्रशासन विचार करें. लंबे समय से खाली पड़े सरकारी आवास के संबंध में शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट ली जायेगी. जरूरत के अनुसार मरम्मती कर सरकारी आवास को बेहतर बनाया जायेगा.

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लेखक के बारे में

By विकाश नाथ

26 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हूं. रिपोर्टिंग के साथ डेस्क का काम करने भी अनुभव प्राप्त है. खेल डेस्क में भी काम करने का अनुभव है. रुरल के संस्करणों को देखता हूं.

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