भीषण गर्मी पड़ने से जन-जीवन बेहाल हो गया है. सुबह आठ बजते ही तापमान चढ़ने लगता है. नौ बजे से सूर्य आग उगलना शुरू कर देता है. गर्मी के कारण लोग अपने-अपने घरों में दुबक जाते हैं. लोग शाम छह बजे थोड़ी राहत के सांस ले पाते हैं. तपती धूप और लू के थपेड़ों से ग्रामीण बेहाल हो गए हैं. क्षेत्र के नदी, नाले, कुआं, तालाब, आहरा, पोखर, डाड़ी, चुआं, चापानल और बोरिंग का जलस्तर घटता जा रहा है. पानी के लिए मानव जीवन से लेकर पशु-पक्षी, जंगली जानवर और मवेशियों में अभी से ही हाहाकार मचने लगा है. सरकार द्वारा चलायी गयी योजना घर-घर जल-नल एक दिखावा बनकर रह गया है. ग्रामीणों को कभी-कभार ही इससे पानी मिल पाता है. इस योजना से कई घर अभी भी वंचित हैं.
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