गैस कनेक्शन दूसरे प्रखंड में ट्रांसफर, उपभोक्ता परेशान

उपभोक्ताओं को सिलिंडर लेने के लिए तय करनी पड़ रही है 30 किमी तक की दूरी

चौपारण. प्रखंड क्षेत्र के गैस उपभोक्ता इन दिनों गैस सिलिंडर भराने को लेकर परेशान हैं. उन्हें गैस सिलिंडर लेने के लिए दिन भर एजेंसी परिसर में लाइन लगानी पड़ रही है. वहीं इंडेन, भारत एवं देवीशिका एचपी गैस एजेंसी से जुड़े कई उपभोक्ताओं का गैस कनेक्शन मूल प्रखंड से हटाकर दूसरे प्रखंडों में ट्रांसफर कर दिया गया है. इस बदलाव से उपभोक्ताओं में नाराजगी है. लोगों का आरोप है कि एजेंसी प्रबंधन ने न तो इसकी कोई सूचना दी और न ही उपभोक्ताओं की सुविधा का ख्याल रखा. अब ग्रामीणों को गैस सिलिंडर लेने के लिए करीब 30 किमी की दूरी तय करनी पड़ रही है. उपभोक्ता जब संबंधित एजेंसी पहुंचते हैं, तो उन्हें तकनीकी गड़बड़ी बताकर बिना सिलिंडर लिये वापस लौटा दिया जाता है. इससे उपभोक्ताओं में एजेंसी के प्रति आक्रोश है. दनुआ के मो फिरोज आलम, सबीना खातून व मो शाबिर, चयकला के ललन, झापा के पप्पू यादव, छकौड़ी यादव, तेतरिया के नरेश सिंह व लोहंडी के बिनोद चंद्रवंशी समेत कई लोगों ने बताया कि उनकी जानकारी के बिना एजेंसी प्रबंधक ने कार्ड का स्थानांतरण कर दिया है. ग्रामीणों ने कहा कि पहले नजदीक में गैस उपलब्ध हो जाती थी, लेकिन स्थानांतरण के बाद गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की परेशानी बढ़ गयी है. खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि परिवहन खर्च बढ़ने के साथ पूरा दिन भी बर्बाद हो रहा है.

एजेंसी प्रबंधन पर मनमानी का आरोप

कई उपभोक्ताओं ने इसे एजेंसी प्रबंधन की मनमानी करार दिया है. उपभोक्ताओं का कहना है कि जब वे असुविधा के कारण अपना कार्ड वापस चौपारण एजेंसी में जोड़ने की बात करते हैं, तो प्रबंधक टालमटोल करते हुए कहते हैं कि फिलहाल उन्हें वहीं से सिलिंडर लेना पड़ेगा. आजसू नेता मोनू अख्तर ने डीसी को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने कहा कि बिना सूचना उपभोक्ताओं को मूल प्रखंड से हटाकर दूसरे प्रखंडों के डीलरों से जोड़ना अन्यायपूर्ण है.

कोट….इस तरह का मामला संज्ञान में नहीं है. अगर ऐसे मामले हैं, तो संबंधित एजेंसियों से बात कर समस्या के निराकरण का प्रयास किया जाऐगा. आखिर किस परिस्थिति में बिना जानकारी के उपभोक्ताओं का गैस कार्ड 20 से 30 किमी दूरी वाले एजेंसी के पास चला गया है. यह जांच का विषय है. जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है.

विक्रम पांडेय, एमओ

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Author: SUNIL PRASAD

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