हज़ारीबाग. विभावि में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन शुक्रवार को सात विशेष व्याख्यान और नौ तकनीकी सत्र में देश भर से आये विषय विशेषज्ञों एवं पंजीकृत शोधार्थियों ने अपना शोध पत्र पढ़ा. सेमिनार का विषय विजन 2047 जनजातीय भाषाएं, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा थी. डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण संस्थान के निदेशक नरेंद्र ने आदिवासी दर्शन एवं उसके वैज्ञानिक आधार, वरिष्ठ साहित्यकार पंकज मित्र ने जनजातीय संस्कृति और समकालीन चुनौतियां, नागालैंड विश्वविद्यालय कोहिमा के प्रो रवि रंजन कुमार ने नागा लोक गीतों में अस्मिता और भारत, डॉ जिंदर सिंह मुंडा ने आदिवासी संस्कृति, भाषा और विश्व दृष्टि के परिपेक्ष में अपने विशिष्ट व्याख्यान दिया. नॉर्थ ईस्टर्न हिल विश्वविद्यालय मेघालय विश्वविद्यालय के भाषाविद प्रो ओम प्रकाश ने एंडेंजर्ड लैंग्वेजेस और रिफॉर्मेशन का लिंग्विस्टिक आइडेंटिटी इन मल्टीलिंगुअल नॉर्थ ईस्ट इंडिया विषय पर अपने शोध से लोगों को अवगत कराया. मातृभाषा के संरक्षित रहने से ही सांस्कृतिक चेतना जीवंत रह सकती है हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्रो पंचानन मोहंती ने कहा कि मातृभाषा के संरक्षित और सुरक्षित रहने से ही संस्कृति और उसकी सांस्कृतिक चेतना जीवंत रह सकती है. प्रो ओम प्रकाश ने पूर्वोत्तर भारत के सभी जनजातीय भाषाओं के स्वरूप और उससे संबंधित आंकड़ों को वैज्ञानिक रूप से प्रस्तुत किया. प्रो पतंजलि मिश्रा ने कहा कि मातृभाषा, लोक भाषा, जनजातीय भाषाओं के विकास पर बल देती है. विकसित भारत के सपने को करने के लिए मातृभाषा को विकसित और संरक्षित करने की जरूरत है. आदिवासी जीवन शैली की अनुकरण की आवश्यकता रणेन्द्र ने कहा कि आदिवासी समाज को आदिवासी जीवन शैली, व्यवहार, जीवन दर्शन, संस्कृति व सामुदायिक समझ और सोच से सीखने और उसे जीवन में अनुकरण करने की आवश्यकता है. डॉ एसएम अब्बास ने जनजातीय समाज के लोक ज्ञान विशेष कर चिकित्सा संस्कृति और देशज चिकित्सा पद्धति और ज्ञान पर व्याख्यान प्रस्तुत किया. तीसरे दिन की संगोष्ठी में केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान के निदेशक प्रो शैलेंद्र मोहन एवं विशिष्ट वक्ता राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान भारत सरकार के पूर्व अध्यक्ष प्रो सरोज शर्मा उपस्थित रहेंगे. समापन समारोह की अध्यक्षता कुलपति प्रो चंद्रभूषण शर्मा करेंगे.
देशभर से आये विशेषज्ञों ने अपना-अपना शोध पढ़ा
विभावि में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन शुक्रवार को सात विशेष व्याख्यान और नौ तकनीकी सत्र में देश भर से आये विषय विशेषज्ञों एवं पंजीकृत शोधार्थियों ने अपना शोध पत्र पढ़ा.
