आपातकाल लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय

परिचर्चा में गिरिजा सतीश ने कहा

हजारीबाग. 1975 के आपातकाल के 50 वर्ष पूरा होने पर बुधवार को जिला लोक समिति की ओर से शहर के सरदार चौक स्थित रोजगार सेंटर में प्रेसवार्ता सह परिचर्चा हुई. अध्यक्षता राष्ट्रीय लोक समिति के अध्यक्ष गिरिजा सतीश ने की. उन्होंने कहा कि आपातकाल भारत के इतिहास की एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी. तत्कालीन सरकार ने संविधान के उलट देश में आपातकाल लागू किया था. जिसका विराेध जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में संयुक्त बिहार समेत देश के छात्र-युवाओं ने किया. वर्तमान में युवा एवं बुद्धिजीवियों को संविधान विरोधी किसी भी निर्णय का विरोध करने के लिए साहस दिखाने की जरूरत है. प्रो केपी शर्मा ने संविधान को एक पवित्र दस्तावेज बताया. पूर्व विधायक गौतम सागर राणा ने कहा कि आपातकाल के दौरान कानून और संविधान की धज्जियां उड़ रही थीं. वर्तमान में लोगों को सजग रहकर ऐसे किसी भी कदम का विरोध करना चाहिए, जो तानाशाही की ओर जाता हो. गणेश सीटू ने सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में रखे जाने पर चिंता जाहिर की. कहा कि इसका विरोध होना चाहिए. बटेश्वर मेहता ने जेपी आंदोलनकारियों को सम्मान देने की मांग की. शमशेर आलम ने दुनिया में चल रही जंग को रोकने की बात कही. अरविंद झा ने नयी पीढ़ी को लोकतंत्र के महत्व से परिचित कराने पर बल दिया. शंकर राणा ने कहा कि देश पुनः आपातकाल जैसी परिस्थितियों से नहीं गुजरे, इसके लिए सम्मिलित प्रयासों की जरूरत है. अधिवक्ता स्वरूपचंद जैन ने कहा कि आपातकाल का विराेध देशभर में हुआ और तत्कालीन सरकार को सत्ता से हाथ धोना पड़ा था. श्री जैन ने वर्तमान परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए कहा कि देश में आज की स्थिति भी अघोषित आपातकाल जैसे हो गयी है. न्याय महंगा होने के कारण देश भर में लाखों गरीब लोग जेल में बंद हैं. मौके पर राजीव सिंह, रूपेश मल्लिक, सुरेश कुमार सहित अन्य लोग उपस्थत थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: SUNIL PRASAD

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >